फोटो- सरला द्विवेदी महाविद्यालय में जानकारी देते कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक। संवाद
कानपुर देहात। बीते पांच सालों में विश्वविद्यालय की कई प्रथाओं को बदला गया है। अब परीक्षा केंद्रों पर बहुत सारे उड़नदस्ते नहीं भेजे जाते हैं। नकल रोकने के लिए सीसीटीवी व एआई मॉडल से निगरानी होती है। कॉपियों में एक जैसे उत्तर मिलने पर नकल पकड़ जाती है। यह बातें शुक्रवार को अकबरपुर के सरला द्विवेदी महाविद्यालय में शुक्रवार को सीएसजेएम विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक ने कहीं।
कुलपति सुबह साढ़े नौ बजे यहां पहुंचे और लॉ विंग में मूट कोर्ट व लाइब्रेरी का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने साइबर सिक्योरिटी में तीसरा कोर्स शुरू किया है। वहीं एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसमें विश्वविद्यालय के शिक्षकों के साथ ही महाविद्यालयों के शिक्षकों को भी प्रतिभाग का मौका दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय व काॅलेजों के शिक्षकों से एक समान व्यवहार उनकी प्राथमिकता है। अब तक चार सौ शिक्षकों को प्रोन्नत किया गया है।
उन्होंने कहा कि एआई सहयोगी है। यह रिप्लेसमेंट करने के लिए नहीं है। विश्वविद्यालय शिक्षकों व विद्यार्थियों के प्रति जवाबदेह है। अब विश्वविद्यालय में समर्थ पोर्टल से ऑनलाइन काम होते हैं। डिजिटल व्यवस्था ने बाबू कल्चर को खत्म किया है। अब किसी को विश्वविद्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कॉलेजों में प्लेसमेंट के जरिए युवाओं को रोजगार दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में बिना संसाधन व शिक्षक के संचालित महाविद्यालयों के सवाल पर उन्होंने कहा कि समय-समय पर जांच कराई जाती है। इसके लिए समाज को जागरूक होने की जरूरत है। यहां पर महाविद्यालय के निदेशक डॉ. विवेक द्विवेदी, प्रबंधक अनिल शुक्ल, ईशानी द्विवेदी, शिक्षाविद नरेंद्र द्विवेदी, अशोक त्रिवेदी, डॉ. देशदीपक द्विवेदी आदि रहे।