हाईकोर्ट के निर्देश पर सेंट्रल जू अथारिटी (सीजेडए) की टीम ने सोमवार को लायन सफारी का निरीक्षण किया। टीम ने यहां पांच घंटे तक शेरों की देखभाल व उनसे जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की और तमाम तथ्यों के बारे में सफारी प्रशासन से पूछताछ की।
इस मौके पर मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव रूपक डे व सीजेडए के आर एस भदौरिया भी मौजूद रहे। टीम के सदस्य काल के गाल में समा चुके शेरों व शावकों की केस हिस्ट्री के दस्तावेज साथ ले गए हैं। सेंट्रल फॉरेस्ट के डीआईजी इंदप धमीजा के नेतृत्व में सीजेडए क ी चार सदस्यीय जांच टीम सोमवार दोपहर 12 बजे लायन सफारी पहुंची।
टीम के अन्य सदस्यों में डॉ. पीसी त्यागी, आईवीआरआई के डॉ. एके शर्मा व चंडीगढ़ जू के डायरेक्टर डॉ. मनीष कुमार हैं। जांच टीम सबसे पहले लायन सफारी के मीटिंग हाल में पहुंची, फिर सफारी के ब्रीडिंग सेंटर की ओर रुख किया।
यहां शेरों के बाड़े के ब्लाक को देखा। एक-एक कर सभी शेरों के बारे में जानकारी ली और उनकी हिस्ट्री का रिकार्ड भी देखा। टीम ने विशेष तौर से बबेसिया की चपेट में आए शेर पटौदी, गीगो, कुबेर व शेरनी जैसिका की बीमारी के बारे में बारीकी से जानकारी जुटाई।
इसके बाद टीम ने वेटनरी हॉस्पीटल की व्यवस्थाएं देखीं। साथ ही एनीमल हाउस, कोर जोन व बाडे़ के ठीक पीछे स्थित शेरों के खुले में घूमने के लिए बनाए गए स्थान को भी देखा। टीम अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपेगी।
सफारी में शेरों की मौत का सिलसिला 30 सितंबर 2014 से शुरू हुआ था। सबसे पहले शेरनी लक्ष्मी की कैनाइन डिस्टेंपर नामक बीमारी से मौत हुई। इसके बाद शेर विष्णु, फिर कुछ माह बाद मनन व शेरनी हीर से जन्मे तीन शावकों की मौत हो गई। शेरनी ग्रीष्मा से जन्मे दो शावक भी जन्म के कुछ घंटे के अंदर ही काल के गाल में समा गए। हाल ही गुजरात से सफारी पहुंची शेरनी तपस्या की बबेसिया बीमारी से मौत हुई थी।