सवारियां भरने को लेकर शनिवार सुबह रोडवेज बस के कंडक्टर को डग्गामार बस के चालक ने साथियों के साथ मिलकर पीट दिया। आरोप है कि डग्गामार संचालक ने रोडवेज बस कंडक्टर से दो हजार रुपये भी छीन लिए। मारपीट से गुस्साएं रोडवेज चालकों ने बसों को आड़ा तिरछा खड़ा करके जाम लगा दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर जाम खुलवाया। घटना की तहरीर कोतवाली में दी गई है।
इलाहाबाद के लीडर रोड डिपो की बस को लेकर कंडक्टर मनोज कुमार यादव इटावा आया था। शनिवार सुबह साढ़े सात बजे रोडवेज तिराहे के पास इलाहाबाद के लीडर रोड डिपो की बस खड़ी कर कंडक्टर मनोज कुमार यादव सवारियां भर रहा था, तभी एक प्राइवेट बस का चालक अपनी बस लेकर वहां पहुंच गया।
उसने बगल में बस खड़ी की और सवारियां भरने लगा। प्राइवेट बस के कर्मचारियों ने रोडवेज बस से भी कुछ सवारियों को उतार लिया। रोडवेज बस से सवारियां उतारने का मनोज ने विरोध किया तो प्राइवेट बस के कर्मचारियों ने मनोज के साथ मारपीट कर दी। आरोप है कि प्राइवेट बस के कर्मचारियों ने उसके पास से दो हजार रूपए भी छीन लिए।
रोडवेज कंडक्टर के साथ मारपीट की जानकारी जैसे ही साथी चालकों को हुई तो वह बसें लेकर तिराहे पर पहुंच गए और जाम लगा दिया, जिससे यातायात ठप हो गया। जाम लगने की सूचना मिलने पर रोडवेज कर्मचारी यूनियन के नेता भी पहुंच गए।
उनका आरोप है कि डग्गामार वाहन संचालक आए दिन रोडवेज कर्मचारियों के साथ मारपीट करते रहते हैं, लेकिन प्रशासन कोई कार्रवाई नही करता है। उन्होंने कहा कि जब तक पुलिस कोई ठोस कार्रवाई नही करती तब तक जाम नही खुलेगा।
जाम की सूचना मिलने पर कोतवाल विनोद यादव मय फोर्स के मौके पर पहुंचे और जाम लगाए लोगों को समझा बुझाकर शांत किया। कोतवाल ने बताया कि तहरीर मिल गई है मारपीट करने वालों का पता लगाया जा रहा है। इस मौके पर कर्मचारी नेता बृजेंद्र यादव व अवधेश यादव भी मौजूद रहे।
डग्गामारी करने वाले बस संचालकों के सामने प्रशासन लाचार है। रोडवेज बस स्टैंड तिराहे के पास से प्रशासन ने सभी रोड पर जाने वाले डग्गामार वाहनों के लिए अलग से व्यवस्था की थी। औरैया की ओर जाने वाहनों को खडे़ करने की व्यवस्था पुराने बूचड़खाने के पास है।
मैनपुरी की ओर जाने वाले वाहनों के लिए जेल के पीछे व फर्रुखाबाद की ओर जाने वाले वाहनों के लिए फर्रुखाबाद फाटक के पास व्यवस्था की गई है। डग्गामार संचालक निर्धारित स्थानों पर खडे़ होने के बजाए बस स्टैंड तिराहे के पास से सवारियां भरते हैं। रोडवेज तिराहे के पास सवारियां भरने को लेकर आए दिन मारपीट होती है लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं देते। इससे रोडवेज को भी भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है।