ब्लॉक क्षेत्र की बीहड़ी ग्राम पंचायत अंदावा में सैकड़ों वर्षों से चलाई जा रही नावों को सेंचुरी विभाग ने बंद करवा दिया।
जबकि जून से पीपा का पुल भी हट जाने से आधा सैकड़ा से अधिक गांवों के लोगों का आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया है। यही नहीं ब्लॉक के करीब दो दर्जन गांव जो चकरनगर तहसील से जुड़े है, वहां के ग्रामीणों को तहसील तक पहुंचने के लिए सात किलोमीटर की बजाय अब महेवा-बकेवर-लखना होकर 30 से 35 किलोमीटर का चक्कर लगाकर चकरनगर तहसील जाना पड़ता है।
अंदावा व नोगवां के पास सैकड़ों वर्ष पुराने घाट होने से यहां हर वर्ष पीपा का पुल अक्तूबर में बना दिया जाता है, जो मध्य जून तक चलता है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस वर्ष यह पुल फरवरी में बनाने के बाद 15 जून को हटा दिया गया, जबकि पुल होने से महेवा और चकरनगर ब्लॉक के करीब आधा सैकड़ा गांवों के लोगों का आवागमन सुगमता से होता था।
लेकिन पुल हटने के बाद नावों का चलन भी सेंचुरी विभाग ने जुलाई के पहले सप्ताह से बंद करा दिया। इसकी वजह से अब चकरनगर तहसील से जुड़े गांवों के लोगों को 30 से 35 किलोमीटर का चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है।
इतना ही नहीं समय व पैसा भी अधिक खर्च हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के इतिहास में पहली बार नाव का चलन बंद किया गया है।
चकरनगर के ये गांव हैं प्रभावित
कांयची, नौगवां, चीतो की मड़ैया, गोहानी, ककरैया, खिरीटी, रनिया, छिबरोली, गोपालपुर, कुंदोल, बछेड़ी, पालीघर, रमपुरा, महाराजपुर, तेजपुरा, गनियावर आदि।
महेवा ब्लॉक के प्रभावित गांव
अंदावा, मड़ैया अहिरान, मड़ैया मल्लाहन, बंगलन, दिलीपनगर, पुरावली, हशनुमंतपुर, लाखी, विनायकपुर, रतनपुर, मेंहदीपुर, रामनगर, नगला छिद्दी, नगला खाद, ढकाताल, बरौख, बिरहाई, इकनोर आदि।
ग्राम प्रधान ममता देवी का कहना है कि वह अपने कार्यकाल में दो बार ब्लॉक व जिला स्तर पर अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत करा चुकी हूं। अब नाव का संचालन भी बंद होने की जानकारी हुई है। इस पर जिलाधिकारी व उपजिलाधिकारी को अवगत कराउंगी कराएंगी। पुल निर्माण की मांग सांसद व क्षेत्रीय विधायक से की जाएगी।
ब्लॉक प्रमुख महेवा अशोक चौबे ने बताया कि इस बारे में डीएफओ व डीएम सहित प्रभारी मंत्री को समस्या से अवगत कराकर समाधान का प्रयास करेंगे।
सेंचुरी क्षेत्र के रेंजर हरिकिशोर शुक्ला ने बताया कि नाव का संचालन कानूनी तौर पर अवैध है, यदि कोई घटना दुर्घटना होती है तो कौन जिम्मेदार होगा। नाव संचालक उच्चाधिकारियों से आदेश लेकर ही नावों का संचालन कर सकेंगे।