कोरोना का संक्रमण का प्रकोप तेजी से जिले में बढ़ रहा है। हालात उतने ही बदतर होते जा रहे हैं। गंभीर मरीजों को चिकित्सा सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
अस्पतालों में भर्ती मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। सैफई आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के एल-थ्री कोविड वार्ड के सभी बेड फुल हैं। बेड फुल होने की वजह से वहां से मरीजों का लौटने का सिलसिला शुरू हो गया है।
बुधवार को इटावा से रेफर दो कोरोना संक्रमित मरीजों को सैफई में बेड नहीं मिला। इससे दोनों मरीजों को सैफई से वापस कर दिया गया। बाद में जैसे-तैसे सीएमओ ने दोनों मरीजों को जिला संयुक्त चिकित्सालय में बने कोविड वार्ड में भर्ती कराया।
सीएमओ डॉ. एनएस तोमर ने बताया कि सैफई आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में 200 बेड का एल-थ्री अस्पताल बनाया गया है। इनमें 158 बेड ही ऐसे हैं, जिनमें कोरोना मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। बुधवार को उन्होंने दो कोरोना संक्रमित मरीजों को गंभीर हालत में सैफई आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय भेजा था।
मरीज के तीमारदारों से पता चला है कि वहां बेड फुल हो गए हैं। अब और मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। बाद में इन मरीजों को जिला अस्पताल के महिला विंग में बने कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सीएमओ के मुताबिक महिला विंग में बने कोविड अस्पताल में अभी 30 मरीज ही भर्ती हैं। बाकी बेड खाली हैं। यहां पर ऑक्सीजन व दवाओं की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि संक्रमित मरीज की हालत गंभीर होने पर सैफई रेफर किया जा रहा है।
सैफई में दो सौ बेड का एल-टू हॉस्पिटल बनेगा। यह जानकारी डीएम की बैठक में सैफई के आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति ने दी।
सैफई के आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में ऑक्सीजन व दवाओं की कमी का मामला चर्चा में आने के बाद डीएम श्रुति सिंह ने मंगलवार की रात विश्वविद्यालय और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की बैठक बुलाई। डीएम ने आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. राजकुमार से कोरोना के बढ़ते मरीजों के मद्देनजर संस्थान की व्यवस्थाओं के बारे में पूछा।
ऑक्सीजन व दवाओं की स्थिति को जाना। सीएमओ डॉ. एनएस तोमर ने बताया कि कुलपति ने दवाओं व ऑक्सीजन की कमी न होने की बात बैठक में बताई।
साथ ही कहा कि संस्थान में जल्द ही दो सौ बेड का एल-टू हॉस्पिटल भी तैयार कराया जा रहा है। इसे भी जल्द शुरू कर दिया जाएगा, ताकि कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जा सके।
डीएम ने आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा है कि यदि किसी भी सामान व दवाओं की जरूरत हो, तो वह संस्थान की स्थानीय कमेटी के जरिए खरीद कर सकते हैं। डीएम ने सीएमओ को भी दवाओं व अन्य सामान की स्थानीय खरीद किए जाने को कहा है, ताकि कोरोना मरीजों के इलाज में किसी तरह की परेशानी न हो सके।