फोटो: 8 जर्जर हाल में पहुंचा भरेह का किला। संवाद
चकरनगर। क्षेत्र की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरें संरक्षण के अभाव में जर्जर हो रही हैं। भरेह किला, राजा निरंजन सिंह जूदेव का किला, राजमहल, भीम कुआं, सिद्धनाथ मंदिर, खेड़ा मंदिर, पचनद संगम और पीपल वृक्ष के नीचे तुलसीदास का तपस्या चबूतरा जैसे स्थल जर्जर होते जा रहे हैं।
इतिहासकारों और धार्मिक ग्रंथों में इन स्थलों का उल्लेख मिलता है लेकिन वर्तमान में अधिकांश स्मारक जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं जबकि इष्टिकापुरी के नाम से प्रसिद्ध यह क्षेत्र पर्यटन की अपार संभावनाएं रखता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते विशेष संरक्षण निधि और व्यवस्थित देखरेख की जाए तो न केवल इन धरोहरों को बचाया जा सकता है बल्कि जिला पर्यटन के क्षेत्र में भी आगे बढ़ सकता है।
ऐसा नहीं हुआ तो ऐतिहासिक धरोहरें खंडहर में तब्दील हो जाएंगी और आने वाली पीढ़ियां अपने गौरवशाली इतिहास की जानकारी से वंचित रह जाएंगी। एसडीएम ब्रम्हानंद कठेरिया का कहना है कि संरक्षण संबंधी कोई मांग नहीं की गई है। यदि आई तो अवश्य ध्यान दिया जाएगा।
चकरनगर के विजय प्रताप सिंह जूदेव का कहना है कि आजादी के गवाह किले जर्जर हो रहे हैं। प्रशासन से कई बार दशा सुधारने की वह मांग कर चुके हैं लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
विनोद सेंगर का कहना है कि भरेह का किला जर्जर हो गया हैं काफी संख्या में लोग किला देखने आते हैं। अगर किले का जीर्णोद्धार करा दिया जाए तो यह एक पर्यटन का केंद्र बन सकता है।