-बिना प्रपत्र के भारत आने पर पासपोर्ट अधिनियम 1920 के तहत होगी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के नगला उदी में आठ दिन पहले संदिग्ध हालत में मिली किशोरी पूछताछ में बांग्लादेशी निकली थी। शुक्रवार को किशोरी के किशोर न्यायालय में बयान करवाए गए। इसके बाद उसे महिला सुधार गृह कानपुर भेज दिया गया। अभी तक किशोरी को जिला मुख्यालय के वन स्टॉप सेंटर में पुलिस सुरक्षा में रखा गया था। पुलिस के अनुसार, बांग्लादेशी किशोरी पर बिना प्रपत्र के भारत आने पर पासपोर्ट अधिनियम 1920 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सिविल लाइंस थानाध्यक्ष केके मिश्रा ने बताया कि क्षेत्र के नगला उदी में मिली बांग्लादेशी किशोरी के पास कोई वैध प्रपत्र नहीं मिला था, जिससे उसकी उम्र व पते के बारे में कोई जानकारी मिल सके। एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव के आदेश पर बांग्लादेशी किशोरी का जिला अस्पताल में उम्र निर्धारण को लेकर मेडिकल करवाया गया था। इसमें किशोरी की उम्र 15 साल निकली थी। शुक्रवार को किशोरी को किशोर न्यायालय में पेश किया गया। यहां किशोरी के बयान करवाए गए। बाद में कोर्ट ने बांग्लादेशी किशोरी को महिला सुधार गृह कानपुर भेज दिया। इससे पहले किशोरी को महिला सुधार गृह बाराबंकी भेजे जाने की तैयारी थी। साथ ही बताया कि बांग्लादेशी किशोरी के भारत आने के वैध प्रमाण पत्र व कागज न होने पर उस पर पासपोर्ट अधिनियम 1920 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें पांच साल कैद व 10 से 50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई जा सकती है। बता दें कि सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के नगला उदी में शनिवार दोपहर को संदिग्ध हालत में बांग्लादेशी किशोरी मिली थी। किशोरी के बांग्ला भाषा बोलने में जब दिक्कत हुई तो ट्रांसलेटर व एआई के माध्यम से उसकी बात समझी गई तो कई बातें सामने आई। किशोरी ने बताया था कि वह पांच भाई-बहन हैं। इसमें एक भाई की मौत हो चुकी है। उनका परिवार मजदूरी वर्ग से आता है। पुलिस की पूछताछ में किशोरी ने इच्छामती नदी के जरिए भारत आने की बात स्वीकार की थी।