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टीबी के प्रति किया जागरूक

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इटावा। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जन आंदोलन कैंपेन के तहत क्षय रोग विभाग पूरे जनपद में लगातार टीबी संवेदीकरण अभियान चला रहा है। इस अभियान के तहत लोगों की स्क्रीनिंग कर टीबी की जांच व टीबी के प्रति लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बीएल संजय ने बताया कि क्षय रोग विभाग की टीमें जनपद में टीबी की जांच और उपचार के लिए उपलब्ध निशुल्क सेवाओं के बारे में लोगों को जानकारी दे रही हैं।
जनपद के सभी ईंट-भट्ठों, साप्ताहिक बाजारों, मेडिकल स्टोर, निजी चिकित्सालय, किशोर कारागार, नशा निवारण केंद्र, नारी संप्रेक्षण गृह, सब्जी मंडी, स्थानीय हाट बाजार में टीबी खोज अभियान चलाया गया।
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इन स्थानों पर क्षय रोग विभाग की टीम लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करते हुए समझाया गया कि टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है। बीमारी को छुपाने से संक्रमण अन्य लोगों में भी फैलता है, इसलिए इसकी जांच और उपचार पूरी तरह निशुल्क है, घबराएं नहीं, इलाज करवाएं।
इटावा निवासी और केजीएमयू रेस्पिरेट्री मेडिसिन विभागाध्यक्ष डा. सूर्यकांत ने कहा कि वह प्रदेश के सभी 75 जिलों के क्षय उन्मूलन कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देंगे, जिससे पीएम मोदी के टीबी मुक्त भारत के सपने को साकार कर सकें।
प्रोफेसर सूर्यकांत ने बताया कि जब टीबी रोग से ग्रसित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है, तो उसके साथ संक्रामक न्यूक्लीआई पैदा होता है, जो हवा के माध्यम से फैल सकता है। विश्व में टीबी का हर चौथा मरीज भारतीय है।
बताया कि लगातार दो हफ्ते तक खांसी आना, खांसी के साथ साथ खून का आना, छाती में दर्द होना, वजन कम होना, शाम को बुखार आना, रात में पसीना आना जैसे लक्षण होने पर मरीज को तुरंत टीबी की जांच करानी चाहिए।
टीबी रोग की जांच एवं उपचार सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध है। कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने का सपना देखा है। टीबी के इलाज में पिछले कुछ वर्षों से बहुत प्रगति हुई है।
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पहले बड़ी टीबी या एमडीआर टीबी के इलाज में दो साल तक का समय लग जाता था, लेकिन अब नई दवाओं के आने से एक साल से कम समय में मरीज का इलाज हो जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में एमडीआर टीबी के रोगियों को सुई लगने वाले इलाज से मुक्ति मिली है। कहा कि अब इनका इलाज खाने की गोलियों से हो जाता है।
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