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Etawah News: तहसीलों में बनेंगे ऑटोमेटिक मौसम विज्ञान केंद्र

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इटावा। बेमौसम बारिश, आंधी-तूफान व बिजली गिरने सहित अन्य आपदाओं की सटीक जानकारी देने के लिए हर तहसील में एक-एक ऑटोमेटिक मौसम विज्ञान केंद्र बनाया जाएगा। इसके साथ ही हर ब्लॉक मुख्यालय पर दो-दो वर्षा मापी यंत्र भी लगेंगे।
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जिले को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से बड़ी सौगात मिली है। इसके तहत, सभी छह तहसीलों में ऑटोमेटिक मौसम विज्ञान केंद्र व सभी आठ ब्लॉक में दो-दो वर्षा मापी यंत्र लगाए जाने का काम शुरू हो गया है। इन उपकरणों की सहायता से किसानों और ग्रामीणों को मौसम की सटीक जानकारी मिलेगी। क्षेत्र में कितनी बारिश हुई है, इसका भी रिकार्ड रहेगा।
एडीएम अभिनव रंजन श्रीवास्तव ने बताया कि केंद्र का काम पूरा होने के बाद जिले में मौसम व बारिश का पूर्वानुमान लगाना आसान हो जाएगा। इसका सबसे ज्यादा लाभ किसानों को होगा। मौसम का पूर्वानुमान होने से फसलों को तेज बारिश, आंधी या ओलावृष्टि की समय पर जानकारी मिलेगी।
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आपदा विशेषज्ञ अवनीश दुबे ने बताया कि आपदा रोकी तो नहीं जा सकती पर यदि समय पूर्व सूचना मिल जाए तो इसका असर कम किया जा सकता है। जिले में ऑटोमेटिक मौसम विज्ञान केंद्र स्थापित करने का काम प्रगति पर है, जल्द उपकरण भी लग जाएंगे। प्राकृतिक आपदाओं से जिले में हर साल भारी क्षति होती है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान बिजली गिरने से होता है। इसकी चपेट में आने से हर साल कई लोगों की जान भी जाती है।
बताया कि इन मौसमी आपदाओं से निपटने व समय पूर्व प्रबंधन की कवायद शुरू करते हुए प्रशासन ने यह निर्णय लिया। ऑटोमेटिक मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना के बाद तापमान, आर्द्रता, हवा के प्रवाह, दबाव, दिशा, गति व वर्षा आदि के बारे में हर 15 मिनट पर अपडेट व सटीक जानकारी मिल सकेगी। मैनुअल व्यवस्था में यह सूचना जुटाने में तीन से साढ़े तीन घंटे लग जाते हैं। इसके साथ ही ब्लाकों में स्थापित यंत्र वर्षा की स्थिति, तापमान व आर्द्रता की जानकारी उपलब्ध कराएगा।

यमुना-चंबल किनारे बसे लोगों को मिलेगी सहूलियत
यंत्रों के लगने से यमुना, चंबल नदी किनारे बसे लोगों और किसानों को फायदा होगा। बे-मौसम बरसात के साथ ही तेज हवा भी किसानों के लिए चुनौती है। इससे खेतों में खड़ी फसल गिर जाती है और नदियों के किनारे बसे लोग विशेषकर चकरनगर व इटावा तहसील के कई ग्राम बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। इससे किसानों को प्रति वर्ष काफी नुकसान होता है। यंत्रों के लगने से इन क्षेत्रों के किसानों को काफी सहूलियत मिलेगी।
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