चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र से गायब भाजपा सांसद अशोक दोहरे से नाराज कार्यकर्ता सोमवार को बैठक के दौरान उनसे भिड़ गए। काफी देर तक सांसद और कार्यकर्ताओं में तीखी नोकझोंक हुई। नाराज कार्यकर्ताओं ने उन्हें भाषण देने से रोका तो सांसद के समर्थकों से भिड़ंत हो गई। दोनों ओर से आस्तीनें तन गईं।
वरिष्ठ भाजपा नेताओं और सांसद के गनर ने उन्हें अलग किया। करीब आधा घंटा चले इस हंगामे में अनुशासित पार्टी का दंभ भरने वाली भाजपा का अनुशासन तार-तार हो गया। सोमवार को इटावा तथा जसवंतनगर के कार्यकर्ताओं की बैठक चल रही थी।
संासद अशोक दोहरे मंच पर पूर्व विधायक अशोक दुबे तथा जिलाध्यक्ष गोपाल मोहन शर्मा के साथ बैठे थे। इसी बीच भाजपा कार्यकर्ता अमित त्रिपाठी मंच के सामने पहुुंचे और सांसद के समक्ष क्षेत्र से गायब रहने की बात पर नाराजगी प्रकट की। संासद ने अनसुना कर दिया तो अमित त्रिपाठी आपा खो बैठे तथा सांसद से भिड़ गए।
दोनों ओर से तीखी नोकझोंक हुई। बात बढ़ी तो नौबत हाथापाई की आ गई। मामला बढ़ता देख सांसद के गार्ड ने धक्का देकर अमित को दूर धकेल दिया। यह देख अन्य कार्यकर्ताओं ने भी अमित का पक्ष लेकर हंगामा कर दिया। एक ओर भाजपा कार्यकर्ता थे तो दूसरी ओर सांसद के समर्थक।
ऐसे में बैठक में अफरातफरी मच गई। मंच पर बैठे भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोहन शर्मा तथा पूर्व विधायक अशोक दुबे ने किसी प्रकार कार्यकर्ताओं क ो समझा-बुझाकर शांत किया। कार्यकर्ताओं ने कहाकि चुनाव से पहले सभी ने द्वार-द्वार जाकर विकास तथा सुशासन के नाम पर जनता से वोट मांगे थे।
लेकिन जीत दर्ज करने के बाद से ही संासद क्षेत्र से नदारद हैं। पार्टी के कार्यक्रमोें में भी कम शिरकत करते हैं। इससे कार्यकर्ताओं को जनता के सामने मुंह चुराना पड़ रहा है। चिंता इस बात की है कि विधानसभा चुनाव आने वाले हैं, उन्हें फिर से जनता के बीच जाना है।
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि संासद ने इटावा से नाता तोड़ लिया है। सांसद निधि वह औरैया ले गए हैं। कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का कहना है कि अशोक दोहरे लोकसभा चुनाव के ठीक पहले बसपा छोड़ भाजपा में आए थे। इस वजह से भाजपा कार्यकर्ताओं से मेलजोल बढ़ाने में भी उनकी कोई रुचि नहीं है।
इस आरोप पर भाजपा सांसद ने पत्रकारों को मौके पर भी कोई जवाब नहीं दिया। फोन किया गया तो कॉल रिसीव नहीं की गई। जिलाध्यक्ष गोपाल मोहन शर्मा ने बताया कि सांसद को मंच पर भाषण के लिए बुलाया गया था। इसी बीच कार्यकर्ता अमित त्रिपाठी उनसे अपनी बात कहने को मंच पर आ गए। उन्हें भाषण के बाद अपनी बात कहने को कहा गया तो आपा खो बैठे। अनुशासनहीनता बरतने वाले कार्यकर्ता को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।