गौवंश को लेकर देशभर में सियासी बवाल मचा हुआ है। ऐसे में बम्हनीपुर गांव के मुस्लिम परिवार में तीन पीढ़ियों से की जा रही गौसेवा अपने आप में एक नायाब मिसाल है। यही नहीं परिवार में बनने वाली पहली रोटी आज भी इस परिवार में गौमाता को ही दी जाती है।
बीफ का मसला हो या दादरी कांड। अनेक मामलों में चला हिंसा का दौर इस क्षेत्र के सांप्रदायिक सौहार्द पर कोई असर नहीं दिखता। यहां दोनों समुदाय के लोग आपस में प्रेम सद्भाव के साथ रहते हैं। ताखा तहसील के बम्हनीपुर गांव में अहमद अली का परिवार गौसेवा करके गंगा जमुनी मिसाल पेश कर रहा है।
यही नहीं उनके भाई दीनअली भी गाय पालते हैं। वह प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्य करने के अलावा लोक कलाओं के रंगमंच पर हरिश्चंद नाटक में अभिनय भी करते हैं। वहीं 50 वर्षीय अहमद अली भी बम्हनीपुर के इंटर कालेज में नौकरी करते है। उनके परिवार में तीन पीढ़ियों से गाय की सेवा होती आ रही है।
अहमद अली के बाबा सादिक अली भी गौ पालक रहे है। उनके पिता बाबू खां भी गौसेवा करते आ रहे है। अहमद अली बताते हैं कि हमारे बाबा ने गाय के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियों दी थी, इसके बाद से ही हमारे परिवार में गाय को लेकर आस्था जागी है। उनके परिवार में जब सुबह का भोजन तैयार होता है, तो पहली रोटी गाय के नाम की ही बनती है।
उनके लिए गाय का उतना ही सम्मान है जिनता आम हिंदू के हृदय में होता है। यही नहीं उनके परिवार में यह परंपरा आगे भी बनी रहे इसके ही वह अपने पुत्र मोहम्मद आरिफ को भी गौ सेवा का महत्व बताते हैं। गाय की सेवा भी करवाते है वही गांव के आमजन भी अहमद अली के परिवार को हर त्योहार सांस्कृतिक कार्यों में बराबर शरीक करते हैं। गौमांस पर छिड़ी बहस पर अहमद अली कहते है कि यदि हर हिंदू गाय पालने लगे तो गाय की बिक्री ही नहीं होगी। एक दूसरे की भावनाओं और आस्था को देखकर मुस्लिम समुदाय को गौमांस का सेवन नहीं करना चाहिए।