इटावा। आने वाले समय में इटावा सफारी पार्क को आगरा के ताज से भी सुंदर रूप दने की कवायद चल रही है। क्योंकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का सपना है कि इटावा सफारी पार्क का आकर्षण ऐसा हो कि देश में पहुंचे विदेशी पर्यटक ताज की जगह सफारी देखने के लिए खिंचे चले आएं। इसके लिए प्राचीन और आधुनिकता में प्राकृतिक समावेश के साथ सफारी को विकसित किया जा रहा है। जिससे पर्यटक को एंट्री गेट से ही सफारी का आकर्षण मंत्रमुग्ध कर दे। इस बात का भी ख्याल रखा जा रहा है कि आने वाले पर्यटकों को थीम गेट से फैसिलिटेटिंग सेंटर के बीच पूरा कर दिया जाए। जिसके बाद पर्यटक सफारी में भ्रमण कर विभिन्न प्रजातियों के वन्य जीवों को पास से देख और महसूस कर सकें।
सफारी पार्क को इन सभी खासियतों के साथ विकसित करने की जिम्मेदारी स्पेनिश एक्सपर्ट फ्रेंक बदिन के कंधों पर है। वह अपनी टीम के साथ इसे बखूबी निभा रहे हैं। इस निर्माण कार्य की थीम को पुरातन काल के निर्माण से जोड़कर तैयार किया गया है। जिससे सफारी पार्क के एंट्री गेट में प्रवेश करने के बाद ही पर्यटकों को यह लगे कि वह किसी ऐसे स्थान पर हैं जो किसी पुरातन सभ्यता से जुड़ा हुआ है। एंट्री गेट के दोनों ओर आरसीसी और पत्थर के ऐसे पीले पहाड़ तैयार किए गए हैं जिससे महसूस होता है कि मानो सफारी का रास्ता किसी पर्वत को काटकर बीच से तैयार किया गया है। यही नहीं यहां पर बनाए जा रहे कैफेटेरिया, रेन सेल्टर, वाटर फाल को भी पीले पत्थरों से ऐसा लुक दिया गया है जैसे इनका निर्माण सदियों पहले हुआ हो।
थीम गेट से लगभग 100 मीटर सफारी में प्रवेश करने पर पर्यटक सेंटर वाटर फाल एरिया में पहुंचेंगे। इस स्थान पर बीचो बीच फौव्वारे का निर्माण अधुनिकता से दूर रहकर किया गया है। पीले पत्थर से बने इस फौव्वारे को देखकर ऐसा महसूस होता है मानो इसका निर्माण वर्षों पूर्व तब हुआ हो जब आधुनिकता मानव सभ्यता के लिए दूर की कौड़ी हुआ करती थी। फौव्वारे के पास ही टिकट काउंटर बनाया गया है जहां से सफारी के भ्रमण के लिए पर्यटक टिकट लेकर आगे जा सकेंगे।
सफारी के सेंटर वाटर फाल एरिया से आगे बढ़ने पर पर्यटकों को एक पहाड़ी नदी मिलेगी। यह नदी फैसिलिटेटिंग सेंटर तक जाने वाले रास्ते में कलकल कर बहेगी। जिससे पर्यटक किसी पहाड़ी क्षेत्र में होने का एहसास करेंगे। वैसे तो नदी को आरसीसी से बनाया जा रहा है लेकिन स्पेनिश आर्किटेक्ट ने इसे जो रूप दिया है उससे यह वास्तविक पहाड़ी नदी की तरह दिखाई देगी। पर्यटक इस नदी के किनारे बैठकर दिन और रात का समय गुजार सकेंगे।
इटावा सफारी पार्क में कैफेटेरिया का निर्माण भी किया गया है। कैफैैटेरिया को इस तरह का रूप दिया गया है जैसे किसी पहाड़ी क्षेत्र में कोई चाय की गुमटी हो। पीले पत्थर से बने इस कैफेटैरिया का भी अपना आकर्षण होगा। जहां पर लोग चाय काफी की चुस्की के साथ फुरसत के पल बिता सकेंगे।
विभिन्न सफारियों में पहुंचने से पहले पर्यटक फैसिलिटेटिंग सेंटर पर पहुंचेंगे। यहां की पथरीली दीवारों पर सफारी में मौजूद वन्यजीवों के चित्र होंगे। साथ ही एक 4 डी थिएटर भी होगा जिसमें बैठकर तमाम वन्य जीवों के बारे में पर्यटक जान सकेंगे। साथ ही सफारी में आगे उन्हें क्या कुछ देखने को मिलेगा इसके बारे में भी पर्यटकों को यहां एक शॉर्ट फिल्म के द्वारा जानकारी दी जाएगी। खाने-पीने की सुविधाओं के साथ यहां पर एक लाइब्रेरी कम शॉप भी होगी जहां पर एशियाटिक शेरों, हिरन, भालू, चीतल, सांभर, तेंदुआ आदि वन्य जीवों का लिटरेचर मौजूद होगा। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के अन्य तमाम पर्यटक स्थलों से जुड़ी पुस्तकें भी लाइब्रेरी का आकर्षण बढ़ाएंगी।
वैसे तो सफारी के पिकनिक स्पॉट पर पहुंचकर पर्यटक सफारी के काफी बड़ हिस्से को एक नजर में देख सकेंगे लेकिन इससे पहले जब वह फैसिलिटेटिंग सेंटर से विभिन्न सफारियों के भ्रमण के लिए निकलेंगे तो यहां बीच रास्ते में लगभग 50 मीटर लंबा ब्रिज मिलेगा। यह ब्रिज दो पहाड़ियों के बीच स्थित गहरी खाई को पाटकर एक दूसरे से मिलाएंगे। इस ब्रिज पर पहुंचकर पर्यटक महसूस करेंगे कि वह किसी जंगली क्षेत्र से होकर गुजर रहे हैं।