समाजवादी परिवार में छिड़ी सियासी रार को समाप्त करके पूरे कुनबे को एकजुट रखने की कोशिशें आखिर परवान न चढ़ सकीं। सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की लाख कोशिशों के बाद भी आखिरकार कुनबा बिखर ही गया। सेक्युलर मोर्चे के गठन के ऐलान से अब स्पष्ट हो गया है कि मुलायम, शिवपाल और अखिलेश, रामगोपाल की राहें जुदा जुदा है। मोर्चे का ताना बाना तो बुन लिया गया है अब उसे मूर्त रूप लखनऊ में बैठकर दिया जाएगा। मुलायम सिंह और शिवपाल सिंह को सेक्युलर मोर्चा के रथ की सवारी कराने में ब्लाक प्रमुख एवं उनके बहनोई डॉ. अजंट सिंह यादव ने सारथी की भूमिका निभाई है।
गुरुवार शाम को इटावा पहुंचे मुलायम सिंह यादव ने काफी सोच विचार के बाद आखिरकार शिवपाल सिंह का साथ न छोड़ने का निर्णय ले ही लिया। मुलायम के इस फैसले से शिवपाल के खेमे में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। अपने राजनैतिक भविष्य को लेकर चिंतित दिखने वाले शिवपाल समर्थकों को जैसे उम्मीद की नई रोशनी मिल गई है।
इस पटकथा की शुरुआत बुधवार को हुई थी। इसी दिन शिवपाल सिंह यादव ने प्रेस कांफ्रेंस कर सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को यह चेतावनी दी थी कि वे अपने वादे के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष पद मुलायम सिंह यादव को सौंप दें। परिवार और पार्टी को एकजुट रखें अन्यथा 15 जून के बाद वे सेक्युलर मोर्चा का गठन कर लेंगे। इस बयान के ठीक एक दिन बाद गुरुवार शाम अचानक मुलायम सिंह यादव इटावा पहुंचे। यहां उनके कार्यक्रम को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया। उन्होंने किसी से मुलाकात नहीं की।
पर्दे के पीछे से मुलायम सिंह और शिवपाल सिंह के बीच राजनैतिक मशविरा कराए जाने की तैयारी चल रही थी। शिवपाल सिंह के करीबी पूर्व एमएलसी रामनरेश यादव, पूर्व जिला अध्यक्ष अशोक यादव शुक्रवार की सुबह नेताजी से मिले। वहीं उनकी बैठक शिवपाल सिंह के साथ कराने की रणनीति बनी। इसके लिए स्थान चुना गया बहनोई डा. अजंट सिंह यादव का आवास। बहनोई अजंट सिंह यादव भी विधानसभा चुनाव के पहले से शिवपाल सिंह के साथ मजबूती से खड़े है। किसी को इसकी भनक नहीं लगी। शिवपाल सिंह यादव सुबह करीब 10 बजे ही बहनोई अजंट सिंह यादव के घर पहुंच गए। इसके बाद ठीक साढ़े 10 बजे मुलायम सिंह यादव अपने काफिले के साथ वहां पहुंचे। बंद कमरे में दोनाें भाइयों के बीच आधा घंटे तक बातचीत हुई। इसके बाद अपनी इकलौती बहन कमला देवी के हाथ से बना चाय नाश्ता करके मुलायम सिंह यादव सीधे लखनऊ चले गए।
मुलायम सिंह की सहमति मिलते ही शिवपाल सिंह यादव ने बिना एक पल गंवाए अपने नए सियासी कदम के बारे में ऐलान कर दिया। सेक्युलर मोर्चा के गठन की अब आगे की रणनीति लखनऊ में तैयार होगी। इस मौके पर पूर्व एमएलसी रामनरेश यादव, पूर्व प्रमुख सैफई डा. अरविंद यादव, धीरेंद्र राव चौबे मौजूद रहे।