इटावा। खाद की किल्लत की बात छोड़ दें, तो अब यह आसानी से किसानों को मुहैया होगी। शासन ने उर्वरक विक्रेताओं को डीबीटी फर्टिलाइजर नाम की मोबाइल एप की सहूलियत दी है। यानी अब ईपॉस मशीन के खराब हो जाने या उपलब्ध न होने पर दुकानदार इस एप से खाद बेच सकेंगे। उनका काम नहीं अटकेगा। वहीं जिले में यह तथ्य भी सामने आया है कि करीब एक सैकड़ा उर्वरक विक्रेताओं के पास ईपॉस मशीन नहीं है। इस एप से ऐसे लोगों को भी फायदा होगा।
जिले में 57 सहकारी सोसाइटी और करीब 600 प्राइवेट दुकानदार खाद बेच रहे हैं। शासन से लागू नियम के अनुसार सोसाइटी हो या प्राइवेट दुकान, सभी जगहों से ईपॉस मशीन से ही किसानों को खाद बेची जाएगी। बगैर मशीन के खाद बेचने पर दुकानदार को कंपनी से सब्सिडी नहीं मिलेगी। हालांकि परेशानी इस बात को लेकर रही कि अव्वल तो सभी दुकानदारों के पास ईपॉस मशीनें उपलब्ध नहीं हैं। कृषि विभाग की जानकारी के अनुसार कुल 572 दुकानदारों को यह मशीनें मुहैया कराई गई हैं। उस पर भी ईपॉस मशीन के खराब हो जाने पर दुकानदारों की बिक्री प्रभावित हो रही है। किसानों को भी सुविधाजनक दुकानों से खाद न मिलने से परेशानी उठानी पड़ रही है।
इन्हीं सब कारणों से शासन ने डीबीटी फर्टिलाइजर मोबाइल एप से खाद बेचने की सुविधा प्रदान की है। दुकानदार इसे मोबाइल व लैपटॉप पर चला सकेंगे। उन्हें अंगूठा निशान लेने वाली डिवाइस लेनी होगी। जिसे वे मोबाइल या लैपटॉप में लगाकर ईपॉस मशीन की तरह खाद की बिक्री कर सकेंगे।
ईपॉस मशीन के खराब हो जाने पर कई दुकानदार हेराफेरी करके खाद बेचने लगे थे। शासन स्तर से यह गड़बड़ी पकड़े जाने पर जांच हुई तो पता चला कि कुछ दुकानदारों ने ईपॉस मशीन के खराब होने पर उर्वरक के थोक डीलर से ईपॉस मशीन से किसान के तौर पर खाद खरीदी और उसे अपनी दुकान पर बेचा। आमतौर पर एक किसान को मसलन 20 बोरी खाद की जरूरत होती है। ऐसे में जब शासन के सामने आया कि किसी किसान ने तादाद से अधिक खाद खरीदी तो उसकी जांच हुई। इसमें यह हेराफेरी पकड़ी गई। इसके पीछे दुकानदारों का कहना था कि मशीन के खराब हो जाने से उनकी बिक्री प्रभावित हो रही थी। लिहाजा यह कदम उठाने पड़े थे।
निदेशालय से 100 ईपॉस मशीनों की डिमांड की थी, लेकिन डीबीटी मोबाइल एप की सुविधा होने से अब मशीनों की कोई खास जरूरत नहीं रहेगी। खाद बेचने का लाइसेंस लेने वालों को आईडी व पासवर्ड दे दिए जाते हैं। वे इसी एप के जरिए आईडी-पासवर्ड का इस्तेमाल करके खाद बेच सकेंगे। इससे किसान व दुकानदार दोनों को सहूलियत मिलेगी।
- अभिनंदन सिंह यादव, जिला कृषि अधिकारी, इटावा