इटावा। कानपुर- टूंडला पैसेंजर के यात्रियों को तीन बच्चियां लावारिस घूमती मिलीं तो उन्होंने जीआरपी के सपुर्द कर दिया। इसके बाद उन्हें बाल संरक्षण इकाई को सौंप दिया। एक बच्ची ने पिता का नाम और पता बताया तो जीआरपी ने उससे संपर्क किया। उसने अपनी तीनों बेटियों को लेने से साफ मना कर दिया। पिता का कहना है कि सप्ताह भर पूर्व उसकी पत्नी बेटियों को लेकर घर से चली गई थी।
रविवार को कानपुर से टूंडला जा रही पैसेंजर ट्रेन में यात्री उस समय असमंजस की स्थित में आ गए जब ट्रेन में तीन बच्चियां इधर उधर टहलती दिखाई दीं। चलती ट्रेन में बोगी में इधर-उधर घूम रहीं बच्चियों के बारे में जब यात्रियों ने जानकारी की तो उनके साथ कोई भी नजर नहीं आया।
इस पर ट्रेन में मौजूद यात्री शीलू राठौर पुत्र चन्द्रभान राठौर निवासी अछल्दा ने तीनों को जीआरपी के सुपुर्द कर दिया। जीआरपी ने तीनों बच्चियों को जिला बाल संरक्षण इकाई को सौंप दिया। यहां बाल संरक्षण अधिकारी सोहन गुप्ता ने जब बच्चियों से पूछतांछ की तो इनमें से सबसे बड़ी छह साल की बच्ची ने अपना नाम अंजली और छोटी बहन उम्र लगभग 5 वर्ष का शानू और तीन वर्षीय तीसरी बच्ची का नाम मनु बताया।
इसके साथ ही उसने अपने गांव का नाम नगला गुलाल बताया। तीनों बेटियां अशोक कुमार निवासी नगला गुलाल थाना खंगर जिला फिरोजाबाद की हैं। वह हाल ही में भदान फाटक के निकट रह रहा है। इस पर श्री गुप्ता ने अशोक से संपर्क कर उसे बच्चियों के बारे में बताया लेकिन उसने अपनी बेटियों को लेने से साफ इंकार कर दिया।
अशोक का कहना था कि उसकी पत्नी देवी उर्फ रूपा एक सप्ताह पूर्व घर छोड़कर अपनी तीनों बच्चियों को साथ लेकर अपने मायके गड़िया अहिरान रूरा चली गई थी। अशोक ने बेटियों को पत्नी रूपा के सपुर्द करने की बात कही। पिता के इंकार करने पर बाल संरक्षण इकाई ने बच्चियों को कानूनी कार्यवाही पूरी करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया जिसके बाद उन्हें शिशु गृह भेज दिया गया।
नाना छोड़ गए थे ट्रेन में
ट्रेन में तीन मासूम बच्चियों को कोई और नहीं बल्कि उनका नाना श्याम कुमार ही छोड़कर गया था। यह बात स्वयं अंजली ने बताई। उसने बताया कि वह तीनों घर से अपने नाना के साथ ट्रेन में सवार हुई थीं। बीच में ही नाना किसी स्टेशन पर यह कह कर उतर गए थे कि अगले स्टेशन पर वह आ जाएंगे वे सब ट्रेन में ही रुकें लेकिन वह नहीं आए।