सैफई। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में कार्यरत डॉक्टर और कर्मचारियों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए कुलपति डॉ. अजय सिंह ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि विवि में कार्यरत कुछ चिकित्सकों और कर्मचारियों के परिसर से बाहर आसपास के क्षेत्रों में मरीजों का उपचार करने और ऑपरेशन करने की शिकायतें मिल रही हैं। इसे शासनादेशों और सेवा नियमों के तहत प्रतिबंधित निजी प्रैक्टिस की श्रेणी में माना गया है।
ऐसे में डॉक्टर और कर्मचारी अगर इसका उल्लंघन करते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। चिकित्सक या कर्मचारी के खिलाफ निजी प्रैक्टिस में संलिप्तता की शिकायत मिलने और साक्ष्य पाए जाने पर नियमानुसार जांच कराई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर जांच और आगे की कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को भी शामिल किया जाएगा। आरोप सिद्ध होने पर संबंधित चिकित्सक या कर्मचारी के खिलाफ शासनादेशों और सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर होगी कार्रवाई
सैफई। इसके साथ ही कुलपति डॉ. अजय सिंह ने कहा कि डॉक्टर और कर्मचारी बिना पूर्व लिखित अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि शासनादेश के अनुसार चिकित्सालय की सेवाएं आवश्यक एवं अनिवार्य चिकित्सा सेवाओं की श्रेणी में आती हैं।
ऐसे में मरीजों को निर्बाध चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संबंधित चिकित्सकों और कर्मचारियों का मुख्यालय पर उपलब्ध रहना अनिवार्य है। मुख्यालय छोड़ने की आवश्यकता होने पर संबंधित चिकित्सक और कर्मचारी को सक्षम प्राधिकारी से नियमानुसार पूर्व लिखित अनुमति लेनी होगी।
बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने से चिकित्सालय की सेवाओं में व्यवधान उत्पन्न होने या मरीजों को असुविधा होने पर संबंधित चिकित्सक अथवा कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।