इटावा। सख्त तेवर और किसी की सिफारिश न सुनने की आदत ही एसएसपी दिनेश कुमार पी के तबादले का कारण बनी। मुख्यमंत्री के गृह जनपद में एसएसपी सिर्फ सात महीना दस दिन ही रह सके। एसएसपी को सत्ताधारी नेताओं के कोप का शिकार होना पड़ा। शासन ने उन्हें डीजीपी कार्यालय से संबंद्ध कर दिया है।
इटावा जिले में बतौर एसएसपी के रूप में दिनेश कुमार पी की 11 फरवरी को तैनाती हुई थी। थाने में तुरंत रिपोर्ट लिखने के सख्त आदेश और अपराधियों की धरपकड़ अभियान के चलते वे चर्चा में रहे। इस बीच उन्होंने मुख्यमंत्री के गृह जनपद में सत्ताधारी दलों के नेताओं की सिफारिशों को भी नजरअंदाज किया। यहीं सपाइयों को खटक गया। उपचुनाव के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं से कहासुनी के बाद सपा के बड़े नेता की नाराजगी का शिकार भी उन्हें होना पड़ा। तभी से उन्हें हटाए जाने की अटकलें शुरू हो गईं थीं। रही सही कसर कोतवाली क्षेत्र में पकड़े गए एक जुआ ने पूरी कर दी। इससे उन्हें प्रदेश के कद्दावर मंत्री की नाराजगी झेलनी पड़ी। इसी कारण से एसएसपी का शासन ने 22 सितंबर को इटावा से हटाकर डीजीपी कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया।
---
जाते-जाते कर गए बड़ा फेरबदल
इटावा से अपना तबादला होने से पूर्व ही एसएसपी दिनेश कुमार ने बड़ा फेरबदल कर दिया। उन्होंने नौ थानाध्यक्षों के कार्य क्षेत्र में बदलाव किया है। उन्होंने पीआरओ रहे आनंद मिश्रा को एसओ चकरनगर बनाया है। इसके अलावा चकरनगर एसओ रामवीर सिंह को बलरई, बलरई एसओ जेपी यादव को पुलिस लाइन भेजा है। जसवंतनगर के एसएचओ दयाशंकर सिंह को सहसों थाना और सहसों के एसएचओ श्रीधर सिंह को जसवंतनगर कोतवाली का चार्ज दिया है। इसके अलावा एसओ ऊसराहार विनोद यादव को एसओ सिविल लाइन। एसओ सिविल लाइन रहे जसवीर सिंह को बढ़पुरा, एसओ लवेदी संजय यादव को ऊसराहार तथा पुलिस लाइन से राजकुमार यादव को एसओ लवेदी बनाया।