जसवंतनगर (इटावा)। तेज रफ्तार मगध एक्सप्रेस रविवार को बड़े हादसे का शिकार होते बची। अप लाइन पर काम कर रही बीसीएम मशीन को ग्रीन सिग्नल दिए जाने के साथ ही नॉन स्टॉप अप मगध एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखा दी गई। इससे पहले कि मगध एक्सप्रेस ट्रैक पर मौजूद बीसीएम मशीन से टकराती चालक ने इमरजेंसी ब्रेक लेकर ट्रेन को रोक लिया और ट्रेन में सवार हजारों यात्रियों की जान बचा ली। इस गंभीर चूक को छिपाने के लिए रेलवे अफसर एड़ी चोटी का जोर लगाए रहे।
हुआ यूं कि इटावा रेलवे स्टेशन पर दो मिनट के ठहराव के बाद रविवार सुबह मगध एक्सप्रेस को दिल्ली की ओर 11:27 बजे रवाना किया गया। ट्रेन अपनी पूरी स्पीड से दिल्ली की ओर बढ़ रही थी। तभी ट्रेन के ड्राइवर ने जसवंतनगर रेलवे स्टेशन के होम सिग्नल के पास रेलवे ट्रैक मरम्मत का काम करने वाली बीसीएम मशीन को खड़ा देखा। सूझबूझ का परिचय देते हुए मगध एक्सप्रेस के चालक ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोकने की पूरी कोशिश की। चालक के प्रयास से बीसीएम मशीन से कुछ ही दूरी पर मगध एक्सप्रेस जाकर खड़ी हो गई। इमरजेंसी ब्रेक लगने से लगे जोरदार झटके के कारण ट्रेन में सवार यात्री सहम गए।
रेलवे सूत्रों से जानकारी मिली कि रविवार दोपहर 11:42 बजे पर अप मगध एक्सप्रेस के ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक लेकर ट्रेन को रोका। जिस समय ट्रेन रोकी गई आगे का सिग्नल भी ग्रीन था, लेकिन बीच में बीसीएम मशीन मेन लाइन पर खड़ी हुई थी। मगध एक्सप्रेस को सिग्नल देने के साथ ही बीसीएम मशीन को अप साइड में जाने के लिए सिग्नल दे दिया गया। गिट्टी फंस जाने के कारण वह आगे नहीं बढ़ पाई और इसी बीच पीछे से ग्रीन सिग्नल मिलने के कारण मगध एक्सप्रेस भी दौड़ती हुई चली आई। ट्रैक पर मगध एक्सप्रेस को आता देख रेलवे कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। मगध एक्सप्रेस के सकुशल रुक जाने पर अफसरों ने राहत की सांस ली। इसके बाद गिट्टी निकालकर ट्रैक पर खड़ी बीसीएम मशीन को पहले रवाना किया गया। बाद में मगध एक्सप्रेस को 16 मिनट बाद 11:58 बजे रवाना किया गया। रेलवे अफसर अपनी इस चूक को छिपाने में पूरी कोशिश करते रहे। अफसरों ने जानकारी देने में भी टालमटोली की। हरिश्चंद्र यादव एसएसई/पीवे जसवंतनगर ने बताया कि मगध एक्सप्रेस को मशीनों की शटिंग होने के कारण रोका गया था।
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ट्रैक मरम्मत का काम करती है मशीन
रेलवे की बीसीएम मशीन ट्रैक मरम्मत का काम करती है। इस मशीन का काम है कि ट्रैक पर पड़ी गिट्टी की छटाई करना है। छटाई के बाद अच्छी गिट्टी को यह ट्रैक पर ही छोड़ देती है, जबकि कूड़ा व कचरे को ट्रैक से अलग कर देती है।
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आखिर कैसे मिला सिग्नल
इटावा सेक्शन में रेलवे की ऑटोमैटिक सिग्नल प्रणाली काम करती है। रविवार को बीसीएम मशीन रवाना करने के लिए ग्रीन सिग्नल दिया गया। बीसीएम मशीन ने ग्रीन सिग्नल क्रॉस भी नहीं किया था कि पीछे से आ रही मगध एक्सप्रेस को भी ग्रीन सिग्नल कैसे दे दिया गया। कहीं न कहीं यह रेलवे में जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों की लापरवाही के कारण ही हुआ।