इटावा। साईं विहार कालोनी में रह रहे लोग बरसात के दिनों को याद करके सिहर उठते हैं। कालोनी में न जलनिकासी के प्रबंध हैं और न ही सड़कें । यह सिर्फ उन नव विकसित कालोनियों का नमूना भर है, जहां प्लाटिंग से पूर्व सरकारी प्रावधानों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया। प्रशासन ने भी समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए। लिहाजा लोग समस्याओं से घिरे हैं। यहां रहने वाले नगरपालिका की चौखट पर दस्तक देते हैं। कुछ एक समस्याएं सुलझ जाती है तो कई उलझी बनी रहती हैं।
यहां यह मसला कालोनी के तयशुदा मानदंडों की अनदेखी का है। आज भी शहर के बाहरी हिस्से में धड़ाधड़ कालोनियाें में प्लाटिंग हो रही है। लोग भी अपने निजी घर की तमन्ना को लेकर रकम लगा रहे हैं। जिस गैरकानूनी ढंग से यह कालोनियां विकसित हो रही है, उससे साफ है कि प्लाटिंग की प्रक्रिया में कोई फेरबदल नहीं हुआ है। बगैर लेआउट पास कराए कृषि योग्य जमीन को खरीद कर कोलोनाइजर्स तो अपने धंधे को चमकाने में लगे हैं। मगर प्रशासन ने अभी भी अपनी लगाम ढीली छोड़ रखी है। अमर उजाला की टीम ने पूर्व में विकसित कालोनियों का जायजा लिया। अमूमन हर कालोनी में मूलभूत सुविधाओं का अभाव दिखा है।
इनमें न तो मानक के हिसाब से सड़कें बनी हैं और न ही पार्क बनाए गए हैं। सबसे बड़ी दिक्कत जल निकासी को लेकर दिखी। कालोनी डेवलप करने से पूर्व सड़क, जल निकासी, पेयजल आदि के जो प्रबंध होने चाहिए थे। उन पर ध्यान नहीं दिया गया। जो अब मुसीबत का कारण बने हुए हैं।
पक्काबाग तिराहे के दक्षिणी दिशा में सांई बिहार कालोनी करीब 6 वर्ष पहले बसनी शुरू हुई थी। यहां करीब आधा सैकड़ा प्लाट काट कर बेचे गए। तमाम मकान खड़े हो चुके हैं और कई प्लाट के रूप में अभी भी पड़े हैं। इस कालोनी में भी बगैर ले आउट के प्लाटिंग की गई। उसका नतीजा यह कि अब यहां बसे लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
यहां के हालात पर गौर करें तो मुख्य सड़क तक जर्जर है। चौड़ाई भी 15 फीट के आसपास दिखती है। यह मानक से कम है। मुख्य सड़क पर एक भी क्रॉस रोड नहीं निकाली गई है। इससे परेशानी यह कि कोई अपने पिछवाड़े स्थित किसी के घर में जाना चाहे तो उसे एक लंबा चक्कर ही काट कर जाना पड़ता है। जल निकासी के भी कोई प्रबंध कोलोनाइजर ने नहीं किए। फिलहाल एक खाली प्लाट में ही घरों का गंदा पानी गिरता है। वो तो गनीमत है कि नई पेयजल योजना के तहत यहां भी पानी की टंकी और पाइप लाइन मुहैया कराई गई है। इससे पीने के पानी की समस्या आने वाले दिनों में दूर हो जाएगी। बरसात में यहां से निकलना लोगों के लिए दुखदाई होता है।
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कोलोनाइजर ने नहीं निभाया वादा
वर्ष 2008 में प्लाट खरीदा था। तब कालोनी संचालक ने जुबानी आश्वासन दिया था कि बैनामा कराने से पूर्व सड़क आदि की व्यवस्था करा देंगे। लेकिन यह वादा पूरा नहीं किया गया। -अजय वर्मा, एलआईसी एजेंट
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चंदा करके लगवाई स्ट्रीट लाइट
जब प्लाट लिया था, तब न तो रोड थी और न बिजली आदि की कोई व्यवस्था। यहां आकर रहने लगे तब आपस में कलेक्शन करके खंभो पर लाइट लगवाई थीं। हालांकि अभी चेयरमैन संटू गुप्ता ने 4-5 मरकरी लाइट लगवा दी हैं।-एसपी चतुर्वेदी, सेवानिवृत्त रेलवे कर्मी
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जलनिकासी की बड़ी दिक्कत
फिलहाल तो जर्जर सड़क और जलनिकासी की बड़ी समस्या है। अभी गर्मी पड़ रही है, मगर बरसात आएगी तो दुश्वारियां बढ़ेंगी। अभी तो एक प्लाट में पानी गिर रहा है। -राम कुमार बरुआ, लेखपाल