ऊसराहार (इटावा)। जिले का एक गांव शराब बंदी की मिसाल बना हुआ है। इस गांव में शराब पीने वाले को पांच हजार रुपया जुर्माना भरना पड़ता है। जुर्माने की रकम का खर्च शराबी के परिवार की भलाई या फिर समाज कल्याण में खर्च की जाती है। ग्रामीणों की शराब बंदी को लेकर चलाई गई मुहिम से पड़ोसी गांव भी सबक लेकर इस राह पर चल पड़े हैं।
ऊसराहार थाने को मयखाना बनाने पर तुले पुलिस कर्मियों के लिए राज्यमंत्री रामसेवक यादव की ग्राम पंचायत का नगला मोतीराम गांव आदर्श नजीर है। यहां के बुजुर्गों ने गांव और समाज में बढ़ रही शराबखोरी को लेकर एक समिति का गठन किया है। इस गांव की आबादी तीन सौ से अधिक है। इसमें दर्जन भर से अधिक लोग सरकारी सेवाओं में हैं। समिति के वरिष्ठ सदस्य रामेश्वर दयाल यादव बताते हैं कि गांव में कोई भी व्यक्ति शराब का सेवन करता है तो उसे समिति के सामने पेश किया जाता है। समिति के सदस्य सुरेश सिंह यादव ने बताया कि शराब पीने वाले की सूचना देने वाले को पांच सौ रुपये इनाम दिया जाता है। शराब पीने वाले पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। आरोपी अगर आर्थिक रूप से कमजोर हो तो फसल कटने पर रुपया वसूला जाता है। यह रुपया उसकी पत्नी के नाम फिक्स डिपाजिट कर दिया जाता है। अगर आरोपी आर्थिक रूप से संपन्न हो तो जुर्माने का रुपया सामाजिक कार्य में खर्च कर दिया जाता है। शराब पीने के जुर्म में पांच हजार रुपया जुर्माना भरने वाले रामनरेश यादव कहते हैं कि उन्हें पांच हजार रुपये जुर्माने के रूप में तो भरे लेकिन शराब न पीने के कारण अब तक कई गुना धन वह बचा चुके हैं। शराब छोड़ने के कारण गांव में उनका सम्मान भी बढ़ा है। ग्रामीणों की इस अनूठी पहल का नतीजा है कि गांव में चारों ओर खुशहाली है। खासकर इसका फायदा महिलाओं को मिला है। शराब के चलते आए दिन होने वाली घरेलू कलह से महिलाओं को छुटकारा मिला है। नगला मोतीराम की इस पहल का अनुसरण आसपास के गांवों में भी किया जा रहा है। थानाध्यक्ष ऊसराहार द्वारा थाने में ही शराब बांटने की खबर इस गांव पहुंची तो ग्रामीण उनकी फजीहत करते नजर आए। ग्रामीणों का कहना था कि ऐसे ही लोग शासन की छवि पर बट्टा लगाने का काम कर रहे हैं।