इटावा। आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्म पके हुए भोजन की दीन दशा से हर कोई वाकिफ है। नियम कायदे सब दरकिनार रहते हैं। न कहीं मेनू के आधार गरीब परिवार के बच्चों को भोजन मिलता है और न जितने बच्चे दर्शाए जाते हैं, उतने मौजूद रहते हैं। सरकार भी इससे अंजान नहीं है। सरकार अब हॉट कुक्ड फूड वितरण का दायित्व आंगनबाड़ी कार्यकत्री से लेकर स्वयंसेवी संस्थाओं को सौंपने जा रही है। जिले में एनजीओ का चयन होना बाकी है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 साल के बच्चों को गर्म पका हुआ भोजन दिए जाने की व्यवस्था है। जिले के 1564 आंगनबाड़ी केंद्रों पर ऐसे 59,127 बच्चे पंजीकृत हैं। इन्हें हर रोज 4 रुपये मूल्य का भोजन महीने में 25 दिन दिए जाने की व्यवस्था है। अव्वल तो केंद्रों पर जितने गरीब परिवारों के बच्चे दर्शाए जाते हैं। उतने उपस्थित नहीं होते। दूसरे इन बच्चों को हॉट कुक्ड फूड योजना के तहत मेनू के मुताबिक भोजन आदि नहीं मिलता। इसी में घालमेल किया जाता है। अब शासन ने गर्म पके भोजन की व्यवस्था एनजीओ को सौंपने का मन बना लिया है। सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत स्वयंसेवी संस्थाओं से आवेदन भी मांग लिए गए हैं। अब सीडीओ की अध्यक्षता वाली 5 अधिकारियों की कमेटी के द्वारा एनजीओ का चयन किया जाना बाकी रह गया है।
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शीघ्र ही कमेटी की बैठक में एनजीओ का चयन कर लिया जाएगा। जिले के लिए सिर्फ एक एनजीओ होगा या फिर ब्लाक स्तर पर अलग-अलग एनजीओ का जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसका निर्णय कमेटी की बैठक में होगा।
-मनोज कुमार वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी, इटावा
सेंट्रल किचन में बनेगा भोजन
बच्चों को मिलने वाला भोजन हरेक आंगनबाड़ी केंद्र में नहीं बनेगा। चयनित एनजीओ किसी एक स्थान पर सेंट्रल किचन बनाएगा। जहां से भोजन आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। केंद्र पर हॉट कुक्ड फूड को आंगनबाड़ी कार्यकत्री सहायिका के माध्यम से बच्चों को वितरण करेगी। यहीं नहीं कार्यकत्री व मातृ समिति के सदस्य के द्वारा हर रोज भोजन की जांच की जाएगी। केंद्र पर हॉट कुक्ड फूड का मेनू और कॉल सेंटर का नंबर भी अंकित रहेगा। मेनू के अनुसार भोजन प्राप्त न होने पर या गुणवत्ता ठीक न होने की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। कार्यकत्री भोजन ग्रहण करने वाले बच्चों की संख्या को हर रोज प्रमाणित करेगी।