इटावा। जिले में दौड़ रहे करीब 10 हजार ई-रिक्शाें में से अभी तक सिर्फ तीन हजार का पंजीकरण हो सका है। सात हजार ई-रिक्शे बिना पंजीकरण के विभिन्न रूटों पर दौड़ रहे हैं। परिवहन आयुक्त ने सभी विभागीय अधिकारियों पत्र जारी कर कहा था कि अन्य वाहनों की तरह ई-रिक्शाें का भी परिवहन विभाग में पंजीकरण कराया जाए। बावजूद विभागीय अफसर इसमें रुचि नहीं दिखा रहे हैं। ई-रिक्शों की वजह से हर मार्ग पर रोजाना जाम की समस्या बनी रहती है।
ई-रिक्शा चलाने के लिए चालकों को प्रशिक्षण प्रमाणपत्र लगाना भी अनिवार्य है। इसके अलावा पंजीकरण का शुल्क निर्धारित सवारी क्षमता के अनुसार लगना है, लेकिन जिले के जिम्मेदार अधिकारियों का इस ओर ध्यान ही नहीं है। इसकी वजह से घटना-दुर्घटना के बाद ई-रिक्शा का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
बिना पंजीकरण संचालित ई-रिक्शों पर कार्रवाई की धीमी प्रगति को लेकर एआरटीओ को अप्रैल में नोटिस मिल चुका है। शासन ने अवैध ई-रिक्शों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसमें एआरटीओ की लापरवाही उजागर हुई थी। इस पर उन्हें नोटिस देकर कार्रवाई में तेजी लाने के लिए कहा गया था। जिला मुख्यालय के साथ ही कस्बों में भी ई-रिक्शों की वजह से अक्सर जाम लगता है। शहर में यातायात पुलिस व नगर पालिका की ओर से कई बार समाधान का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। ई-रिक्शा के लिए स्टैंड बनाने की बात हुई तो विवाद हो गया। ई-रिक्शा में रंग की पट्टी लगाकर रूट प्लान तय किया गया, लागू भी किया गया, मगर यह कुछ दिनों तक ही चल सका। इसके बाद समस्या ज्यों की त्यों हो गई।
वर्जन
अवैध रूप से संचालित हो रहे ई-रिक्शा पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। जून में करीब 200 ई-रिक्शा पर कार्रवाई की गई है। इसके बाद ई-रिक्शा के पंजीकरण में तेजी आई है। जल्द ही सभी ई-रिक्शा का पंजीकरण करवा दिया जाएगा। -प्रदीप कुमार, एआरटीओ