सीवर लाइन से दो सौ मीटर की परिधि में सीवर कनेक्शन लेना अनिवार्य है। इसके बाद भी लोग ऐसा नहीं कर रहे हैं। सीवर प्रोजेक्ट का फर्स्ट फेज पूरा हुए करीब आठ महीने बीत चुके हैं लेकिन अब तक 50 हजार मकानों में से महज तीन ने शुल्क जमा कर कनेक्शन लिए हैं।
वह भी तब जब नगर पालिका ने कनेक्शन शुल्क दो दो हजार रुपये से घटाकर मात्र पांच सौ रुपये कर दिया है। गौरतलब है कि सीवर प्रोजेक्ट का फर्स्ट फेज पूरा होने के बाद करीब आठ महीने पहले जलनिगम ने इसे नगर पालिका को विधिवत हैंडओवर भी कर दिया था।
नगर पालिका बोर्ड की बैठक में सीवर लाइन से दो सौ मीटर की परिधि में आने वाले मकानों के लिए कनेक्शन लेना अनिवार्य किया जा चुका है। कनेक्शन शुल्क भी कम कर दिया गया लेकिन इसके बाद भी न तो लोगों ने खुद कनेक्शन लेने की दिशा में कोेई रुचि दिखाई और न ही पालिका की ओर से कोई कार्ययोजना तैयार की गई।
आंकड़ों के मुताबिक, अभी तक मात्र तीन कनेक्शन हो पाए हैं जबकि शहर में मकानों की संख्या 50 हजार से अधिक बताई जा रही है। दरअसल फस्ट फे ज में सीवर लाइन का काम पुराने में शहर में पूरा हुआ है।
यहां पर पहले से लोगाें के मकानों में टैंक शौचालय बने हैं। चूंकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं है इसलिए वे कनेक्शन लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
टैंक सिस्टम से सस्ता सीवर
अधिकारियों का कहना है कि टैंक सिस्टम से सीवर काफी सस्ता है। लैट्रिन के लिए टैंक का निर्माण कराने में करीब 50 से 60 हजार रुपये का खर्चा आता है।
दो साल के बाद टैंक सफाई कराने पर 5 हजार रुपये का खर्चा आता है जबकि सीवर का एक बार 500 रुपये का शुल्क अदा कर कनेक्शन लेना है। इसके बाद निर्धारित मासिक शुल्क अदा करना है।
नालियों में बहती है गंदगी
कई मोहल्लों में लोगाें ने मकान में टैंक शौचालयों का निर्माण कराकर पाइप नाली की ओर निकाल दिया है। टैंक के ओवरफ्लाें होने पर मलयुक्त पानी नालियों में बहना शुरू हो जाता है।
बरसात के मौसम में तो गंदगी सड़कों पर आ जाती है और वातावरण दूषित हो जाता है। उक्त शौचालयों के कारण संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका भी रहती है।