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Etawah News: बिना सुरक्षा मानकों के फर्राटा भरती मिलीं 38 स्लीपर बसें

Mon, 28 Sep 2026 12:39 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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फोटो 11: बकेवर में ओवरब्रिज के पास सवारियां बैठाती स्लीपर बसें। संवाद - फोटो : आकांक्षा समिति की अध्यक्ष नेहा शर्मा ने राजकीय बालगृह में बच्चों को कापी-किताबें वितरित कीं,मिष्ठान बांटा। स्रोत सूचना विभाग
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इटावा। नोएडा में स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की जलकर मौत और 25 से अधिक सवारियों ने कूदकर जान बचाई थी। इस हादसे बाद भी परिवहन विभाग की ओर से सख्ती नहीं दिखाई दी। इसके बावजूद जिले में स्लीपर 38 बसें नियमों की अनदेखी कर सड़कों पर फर्राटा भर रही हैं। बसों में क्षमता से अधिक सवारी और ऊपर सामान लोडकर नियमों की अनदेखी की जा रही है। ऐसे में इन बसों में हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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जिले में 230 निजी बसें पंजीकृत हैं। इसमें 175 स्लीपर बसें हैं जबकि 55 साधारण बसें शामिल हैं। शहर के मानिकपुर रोड से लेकर आईटीआई चौराहे पर शाम छह बजे ही स्लीपर बसों का जमावड़ा लगने लगता है। इसमें स्लीपर बसों में एसी व नॉन एसी बसें शामिल रहती हैं। इन बसों में गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, कानपुर, बनारस व लखनऊ आदि जगहों की सवारियां भरी जाती हैं। हाईवे पर दौड़ रही स्लीपर बसें शामिल हैं, जिसमें आग से बचाव के सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं।
कुछ बसों को मॉडिफाई करके चलाया जा रहा है। इसमें 35 से 40 सवारियों के स्थान पर 50 से 55 सवारियां बैठाई जा रही हैं, जो हादसों को दावत देती हैं। सितंबर में हुई जांच में 38 स्लीपर बसें अनफिट पाई गई थी। इन बस संचालकों को नोटिस देकर बसों में कमियों को पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। बिना खामियां दूर किए हाईवे पर चलते मिलने पर बंद करने की चेतावनी दी गई थी। परिवहन विभाग ने बीते दो माह में 132 वाहनों का चालान करने के साथ तीन बसों को सीज करने की कार्रवाई की गई थी।
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हाईवे पर जगह-जगह सवारियों के बैठाने से होते हादसे
नेशनल हाईवे पर अन्य जिलों से आने वाली स्लीपर बसें नियम विरुद्ध बसों को रोककर सवारियों को बैठाती हैं। ऐसे में पीछे से आ रहे वाहन अंधेरे में बसों से टकरा जाते हैं। ऐसे ही जिले में कई हादसे हो चुके हैं। जिले में बकेवर, बकेवर ओवरब्रिज, मानिकपुर रोड, आईटीआई चौराहे, जसवंतनगर आदि जगहों पर स्लीपर बसों को रोका जा रहा है। परिवहन विभाग की ओर से कार्रवाई के बाद कुछ दिनों तक मामला शांत रहने के बाद फिर शाम होते ही इन जगहों पर जमावड़ा लगने लगता है।
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लगेज बॉक्स में भरी जाती है व्यावसायिक व ज्वलनशील सामग्री
स्लीपर बसों के लगेज बॉक्स में व्यावसायिक और ज्वलनशील सामान ले जाना पूरी तरह से गैर-कानूनी और जानलेवा होता है। इसके बावजूद चालक-परिचालक थोड़े रुपये के लालच में मानकों की अनदेखी कर अवैध सामग्री को भर लेते हैं। स्लीपर बसों के लंबी दूरी तय करने पर ये सामान गर्म होकर आग लगने का मुख्य कारण बनता है। परिवहन विभाग के अफसर निरीक्षण के समय इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। बड़ा हादसा होने के बाद ही ऐसी बसों की पड़ताल कर खानापूर्ति कर ली जाती है।

स्लीपर एसी बसों के ये होते हैं मानक-
बसों में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण होने चाहिए।
स्लीपर बस में कम से कम 1980 मिमी की लंबाई होनी चाहिए।
निचली बर्थ की ऊंचाई कुशन से 200 से 350 मिमी के बीच होनी चाहिए।
एसी स्लीपर बसों की मानक ऊंचाई 3800 मिमी निर्धारित है।
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फिटनेस के ये मानक-
-एआरटीओ से एक साल में फिटनेस प्रमाणपत्र लेना जरूरी।
-चालक का डीएल, इस्तेमाल का ब्योरा, प्रदूषण व बीमा अनिवार्य हो।
-इंडीकेटर लाइट, खिड़की-दरवाजे व रखरखाव बेहतर हो।
-चेचिस की हालत ठीक हो, टायर-ट्यूब की स्थिति सही हो।
-तकनीकी तौर पर वाहन की स्थिति, इंजन पूरी तरह सही होना चाहिए।

पिछले दिनों स्लीपर बसों में हुई आग की घटनाएं-
07 सितंबर 2026: इटावा के फ्रेंड्स कॉलोनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत नेशनल हाईवे पर दिल्ली से राठ (हमीरपुर) जा रही बुंदेलखंड ट्रेवल्स की एक स्लीपर बस में अचानक भीषण आग लग गई थी। बस में सवार लगभग 40 यात्रियों ने खिड़कियों से कूदकर अपनी जान बचाई थी। इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी, लेकिन यात्रियों का सामान और दस्तावेज जलकर खाक हो गए थे।
-24-25 जून 2022: आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर इटावा जिले के उसराहर थाना क्षेत्र के पास गोंडा से दिल्ली जा रही एक प्राइवेट एसी स्लीपर बस में चलती हालत में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई थी। बस में करीब 120 यात्री सवार थे। गनीमत यह रही कि समय रहते पुलिस और यूपीडा की टीम ने सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया था।
वर्जन-
जिले से होकर गुजरने वाली स्लीपर बसों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। 132 से अधिक बसों पर कार्रवाई करते हुए चालान किया गया है। नियम विरुद्ध चलने पर तीन वाहनों को सीज किया गया है। साथ ही बस संचालकों को मानकों को पूरा करने की चेतावनी दी रही है। जल्द ही संयुक्त टीम बनाकर बिना मानक चल रही स्लीपर बसों पर कार्रवाई की जाएगी।
-प्रदीप कुमार, एआरटीओ।

फोटो 11: बकेवर में ओवरब्रिज के पास सवारियां बैठाती स्लीपर बसें। संवाद- फोटो : आकांक्षा समिति की अध्यक्ष नेहा शर्मा ने राजकीय बालगृह में बच्चों को कापी-किताबें वितरित कीं,मिष्ठान बांटा। स्रोत सूचना विभाग

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