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निशुल्क पुस्तकें व ड्रेस दिए फिर बैग क्यूं नहीं

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अमर उजाला ब्यूरो
इटावा। भले ही एडेड जूनियर एवं राजकीय व एडेड इंटर कालेज और मदरसा विद्यालयों के प्राइमरी से जूनियर तक के बच्चों के लिए सुविधाएं समान हों। पर सरकार की नि:शुल्क बैग वितरण योजना से इनको वंचित रखने पर सवाल उठ रहे हैं। परिषदीय विद्यालयों की तरह ही इनमें भी बच्चों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। इन स्कूलों के कक्षा आठ तक के बच्चों के अभिभावकों में इस भेदभाव से रोष है।


प्रदेश सरकार ने कक्षा आठ तक के बच्चों को नि:शुल्क बैग वितरण की घोषणा की है। नियमत: सरकार द्वारा जो भी सुविधा बच्चों को दी जाती है वह सिर्फ वित्तविहीन विद्यालयों को छोड़कर अन्य सभी प्रकार के विद्यालयों के कक्षा आठ तक के बच्चों को भी र्दी जाती है। इस बार भी नि:शुल्क पुस्तकों का वितरण परिषदीय विद्यालयों के साथ साथ एडेड जूनियर हाईस्कूलों व राजकीय एवं एडेड इंटर कालेजों और मदरसा के कक्षा आठ तक के बच्चों में भी किया गया। नि:शुल्क यूनिफार्म का वितरण भी वित्तविहीन विद्यालयों को छोड़कर अन्य सभी स्कूलों में किया गया। पर सिर्फ परिषदीय विद्यालयों के बच्चों में ही बैग बांटे गए।
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अन्य विद्यालयों के शिक्षकों ने विभाग से जानकारी की तो पता चला कि उनके विद्यालयों के बच्चों को नि:शुल्क बैग वितरण योजना में सम्मिलित नहीं किया गया है। इससे अभिभावकों में रोष है। अभिभावक रामविजय, हरिश्चंद्र का कहना था कि उनकी बेटियां शोराबाल स्कूल में कक्षा आठ में पढ़ती हैं। उन्हें यूनिफार्म दी गई, कुछ किताबें भी मिलीं पर बैग नहीं दिया गया। जबकि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को बैग दिया जा रहा है। सरकार बच्चों के साथ भेदभाव क्यों कर रही है।


जनपद में निशुल्क बैग वितरण योजना के अंतर्गत कुल 104749 बैग ही शासन से प्राप्त हुए हैं। इतनी ही संख्या परिषदीय प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूल विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की है। जिले में पिछले दिनों बच्चों को जो ड्रेस वितरित की गई थी उनकी संख्या करीब एक लाख 23 हजार थी।
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बीएसए ओपी सिंह ने कहा कि शासन के निर्देशानुसार बैग वितरण योजना केवल परिषदीय प्राइमरी व जूनियर विद्यालयों के बच्चों के लिए ही है। उसी के अनुरूप शासन द्वारा बैग उपलब्ध कराए गए है। अन्य सभी प्रकार के विद्यालयों के बच्चों को इस योजना में सम्मिलित नहीं किया गया है।


-सिर्फ परिषदीय स्कूलों के बच्चों को ही दिया जा रहा है बैग
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