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चौबीस घंटे बाद भी लाखों रुपये की चोरी की घटना का नहीं हुआ खुलासा

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चकरनगर। सहसो थाना क्षेत्र में हनुमंतपुरा चौराहे पर ज्वैलर्स की दुकान से लाखों रुपये के आभूषण चोरी होने के मामले का खुलासा 24 घंटे बाद भी पुलिस नहीं कर पाई है। व्यापारियों का आरोप है कि पुलिस अंधेरे में तीर चला रही है। पुलिस किसी को भी संदिग्ध बताकर थाना बुलाकर पूछताछ कर रही है।
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शनिवार की भोर हनुमंतपुरा चौराहे पर चौकी के पास उमेश भदौरिया की ज्वैलर्स की दुकान से करीब 55 लाख से अधिक के सोने-चांदी के जेवर बदमाश नकब लगाकर चुरा ले गए थे। खेतों में रखवाली कर रहे एक किसान राम सिंह ने बदमाशों को देखकर चौकी जाकर पुलिस को जगाने का प्रयास किया था। पुलिस गहरी नींद में सोती रही और बदमाश आभूषण लेकर फरार हो गए।
इस कांड से व्यापारियों में भी रोष है। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। चोरी की वारदात को चौबीस घंटे बीतने के बाद भी पुलिस खाली हाथ है और अब तक न ही घटना का खुलासा हो सका और बदमाशों का पता चल सका है। पुलिस ने कुछ ग्रामीणों को पूछताछ के लिए थाने में जरूर बैठा रखा है। अभी तक घटना से जुड़े किसी भी अपराधी को नहीं पकड़ा गया है।
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चौराहे के व्यापारियों ने बताया कि अभी तक कोई खुलासा नहीं हुआ और पुलिस अंधेरे में तीर चलाने में जुटी हुई है। किसी को भी संदिग्ध बताकर पुलिस पूछताछ के लिए थाना पर बुला रही है। वहीं थाना पुलिस कुछ बताने की स्थिति में नहीं है। पुलिस का कहना है कि शीघ्र मामले का खुलासा किया जाएगा। पुलिस सक्रियता से काम कर रही है।
इनसेट-
लाखों के चोरीकांड से बीहड़ क्षेत्र के जनमानस में दहशत
- हनुमंतपुरा चौराहे पर हुए लाखों रुपये के चोरी कांड ने लोगों में दहशत और बेचैनी पैदा कर दी है। चंबल के बीहड़ों में दस्युओं के सफाए के बाद आम जनमानस में भय का वातावरण पूरी तरह समाप्त हो गया था। कभी कभार जुआरी, नशेड़ी या चोरी की घटनाएं होती थीं। लेकिन ज्वैलर्स की दुकान में नकब लगाकर लाखों रुपये के आभूषण चोरी कर फरार हुए बदमाशों ने एक बार फिर बीहड़ के जनमानस में बेचैनी पैदा कर दी है।
सिंडौस गांव के पूर्व प्रधान सज्जन सिंह राजावत कहते हैं कि बीहड़ शांत था, लेकिन इस शांति के पीछे कहीं न कहीं अपराध पनप रहा था। यह बात इस चोरी कांड ने साबित कर दी है। व्यापारी पप्पू दुबे ने बताया कि डाकुओं के समय में कभी इस तरह की चोरी नहीं हुई और अब तो बाजार मे बेखौफ होकर व्यापार चल रहा था। उस दौर में तो डकैत भी खाने-पीने का सामान ले लेते थे। इस घटना से व्यापारी अपने को असुरक्षित मान रहे हैं और व्यापारियों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
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