बकेवर। महेवा विकास खंड की ग्राम पंचायत धौरखा में पंचायत निधि से कराए गए नाली, खड़ंजा और शौचालयों में घपले की जिला स्तरीय समिति ने जांच की। शिकायत पर जिला सांख्यिकीय अधिकारी और अवर अभियंता जिला पंचायत ने गांव पहुंचे तो शौचालयों के निर्माण में गड़बड़ी मिली। एक युवक व उसके पुत्रों को चार शौचालय दिए गए पर मौके पर केवल एक ही शौचालय मिला।
गांव निवासी दीपक राजावत ने जिलाधिकारी जेबी सिंह को दिए प्रार्थनापत्र में पंचायत निधि से कराए गए सड़क निर्माण, शौचालय व तालाबों की साफ सफाई जलभराव व हैंडपंपों को रीबोर कराने में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की।
जिला सांख्यिकीय अधिकारी प्रवीण टिंगल व अवर अभियंता जिला पंचायत एआर रहमान शनिवार की सुबह ग्राम धौरखा जांच करने पहुंचे। ग्रामीणों की शिकायतें सुनीं। किसी ने शौचालय न बने होने के बावजूद रुपये निकालने की शिकायत की तो किसी ने मनरेगा सूची में मृतक लोगों के नाम दर्ज होने की बात की। इस पर टीम ने स्थलीय निरीक्षण किया। मनीषा राजावत के यहां स्वयं का शौचालय मिला जबकि रुपये इनके नाम पर निकाल लिए गए हैं। कृष्ण सिंह, सत्येन्द्र सिंह, दिगंबर सिंह के यहां न तो गड्ढा खुदा मिला और न ही सीट रखी पाई गई। महज शौचालय की दीवार मिली। रमन सिंह के घर पर महज एक शौचालय बना मिला लेकिन कागजों की सूची में चार शौचालय के रुपये निकाले गए। इस तरह के करीब 70 मामले जांच टीम को मिले। इसके अलावा मनोहर के घर से कृष्ण के घर तक बनी सड़क की भी नापतौल करके व खुदवाकर जांच की। लेकिन, यह सड़क मनोहर के घर से नहीं बनाई गई। बल्कि उनके घर के आगे से बनाई गई। यही नहीं दूसरी सड़क कृष्ण के घर से कल्लन के खेत तक बनाई गई। लेकिन, पहली बरसात में ही इसकी पोल खुल गई। जगह जगह गड्ढे हो गए।
नवीन सामुदायिक केंद्र की भी नापजोख करने के साथ उसको देखा गया। तालाब में कभी पानी नहीं भरा गया। लोगों की नालियों से पानी तालाब में घरों का आता है। उस पर भी पानी भराने के नाम पर रुपये निकाले गए। इसके अलावा गांव में तैनात सफाईकर्मी के सफाई न किये जाने की भी जांच की गई। मनरेगा में दो महिलाएं के जॉब कार्ड बनाए गए जो काम करने नहीं जाती हैं।
इस जांच के दौरान लोगों की भीड़ प्रधान के विरोध में देखने को मिली। प्रधान समर्थकों व ग्रामीणों के बीच इस दौरान झड़पें भी हुईं। लवेदी थानाध्यक्ष अमान सिंह ने पुलिस फोर्स को भेजकर भीड़ को तितर बितर कराया। मौसम खराब होने के चलते जांच टीम महज तीन गलियों की ही देखकर चली गई, लेकिन शिकायतकर्ता पूरे गांव में घूमकर जांच कराने की मांग करते दिखे। इस मौके पर ग्राम प्रधान अवधेश दोहरे व सचिव सौरभ सिंह सहित एक सैकड़ा से अधिक ग्रामीण साथ में रहे।