इटावा। बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित निजी अस्पताल के आईसीयू में आग लगने से पांच लोगों की मौत हो गई। वहीं, जिले में स्वास्थ्य सेवा के नाम पर चल रही इलाज की दुकानें मरीजों के लिए मौत का कुआं साबित हो सकती हैं। अग्निशमन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले के 22 बड़े निजी अस्पताल अग्निशमन विभाग के बिना किसी अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें 16 अस्पतालों ने फायर सर्टिफिकेट का नवीनीकरण अभी तक नहीं कराया है। इस भीषण गर्मी में अगर इन अस्पतालों में आग की कोई घटना हो जाती है तो बड़ी जनहानि से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
अग्निशमन विभाग ने पिछले साल अगस्त 2025 में अधूरे मानकों वाले अस्पतालों को नोटिस जारी कर चेताया था। नोटिस मिलने के महीनों बाद भी अस्पताल संचालकों ने मानकों को पूरा करने की आवश्यकता नहीं समझी। नतीजा यह है कि आज भी इन अस्पतालों में कभी भी कोई अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
नियमों के मुताबिक, हर छोटे-बड़े अस्पताल में आग से बचाव के लिए स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर एक्सटिंग्विशर, आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) और पर्याप्त पानी की व्यवस्था होना अनिवार्य है। जिले के इन 22 अस्पतालों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।
शिव ज्योति महिला चिकित्सालय-कटरा फतेह महमूद खां, डॉ. ममता गुप्ता मेमोरियल हॉस्पिटल-सिविल लाइंस, आदित्य हॉस्पिटल एवं हार्टकेयर सेंटर-आगरा रोड, शिवम सर्जिकल नर्सिंग होम, केकेएन हॉस्पिटल, एमएन लाइफ केयर नर्सिंग होम, चौधरी नर्सिंग होम, गणेश लक्ष्मी मेडिकल सेंटर, प्रज्ञा हॉस्पिटल, ब्लू आई हॉस्पिटल इकदिल, न्यू कृष्णा हॉस्पिटल, बांके बिहारी हॉस्पिटल, पंचशील हॉस्पिटल-भरथना रोड, मायादेवी हॉस्पिटल-ग्वालियर रोड, राज हॉस्पिटल-मानिकपुर, वृंदावन हॉस्पिटल, शिवम हॉस्पिटल, आयुष्मान हॉस्पिटल और श्री राधा रमन हॉस्पिटल जसवंतनगर।
बीआर सेठ जी मेमोरियल हॉस्पिटल-सैफई, रुद्राक्ष हॉस्पिटल-कचौरा रोड, देवांश हॉस्पिटल-भरथना, ओम हॉस्पिटल-रणवीर नगर, मून लाइट हॉस्पिटल-पक्का बाग, न्यू लाइफ प्लस हॉस्पिटल, राधा स्वामी हॉस्पिटल-भरथना, विनायक हॉस्पिटल, न्यू मेट्रो हॉस्पिटल, धन्वंतरि हॉस्पिटल, पक्का बाग, श्री खाटू श्याम हॉस्पिटल-भरथना, देव हॉस्पिटल, शारदा हॉस्पिटल-ऊसराहार, मां काली कारगिल शहीद धर्मार्थ चिकित्सालय-जसवंतनगर, नारायणी क्लीनिक एंड मेडिकेयर सेंटर-नौरंगाबाद और न्यू सिटी हॉस्पिटल आईटीआई चौराहा।
सीएफओ सत्येंद्र पांडेय ने बताया कि जिन अस्पतालों ने अभी तक विभाग से एनओसी नहीं ली है। वह जल्द से जल्द एनओसी ले लें। साथ ही 16 अस्पताल शीघ्र ही अपना नवीनीकरण करवा लें। ऐसा न करने पर जिलाधिकारी-पुलिस अधीक्षक के आदेश पर उनके खिलाफ विभाग विभागीय कार्रवाई की जाएगी। दो जिलों का प्रभार होने की वजह से एक दिन इटावा में बैठना होना होता है, बाकी दिन फिरोजाबाद में बैठते हैं। बताया कि अग्निशमन विभाग के मानक पूरे न करने पर विभाग उच्चाधिकारियों की संस्तुति के बाद एनओसी न लेने वाले अस्पताल, होटल, रेस्तरां, सिनेमा हॉल, मॉल आदि की बिजली व पानी रोकी जा सकती है।
संयुक्त जिला अस्पताल में फरवरी 2025 में फायर सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए तीन करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था। इसमें अभी तक 50 फीसदी की काम पूरा हो सका है। बाकी का काम बजट के अभाव में कई माह तक अधूरा पड़ा है। पुरुष जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पारितोष शुक्ला ने बताया कि मार्च में बजट मिल गया था। इसको यूपीपीसीएल कंपनी को स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके बाद भी काम में तेजी नहीं आ पा रही है। कंपनी के अधिकारियों को पत्राचार कर काम में तेजी लाने का प्रयास किया जाएगा। इससे जल्द से जल्द फायर सिस्टम का काम पूरा हो सके।