शहर की नई पेयजल पाइप लाइन योजना में केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत मुफ्त कनेक्शन दिए जाएंगे। इसमें आधा इंची पाइप लाइन और फिटिंग का खर्च सरकार वहन करेगी। इस काम पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च हाेंगे। जिसमें वाटर मीटर और नि:शुल्क कनेक्शन शामिल हैं। ऐसे में बिना अनुमति अवैध कनेक्शन लेकर पानी लेेने वालों को झटका लगा है। एक तो वह इस फ्री सुविधा से वंचित रहेंगे वहीं उन पर कार्रवाई भी हो सकती है।
करीब सवा अरब रुपये की लागत से शहर में पेयजल योजना को 13 जोन में बांटकर लागू किया गया है। कई जोन में कार्य जारी है। जिन जोन या सब जोन में टंकी, ट्यूबवेल लेकर पाइप लाइन बिछने का काम पूरा हो चुका है, उन मोहल्लों में धड़ाधड़ कनेक्शन हो रहे हैं। लेकिन अभी सिर्फ चार जोन ही नगरपालिका को हस्तगत हुए हैं। ऐसे में नगरपालिका और जलनिगम इन कनेक्शन को अवैध मान रहा है। अब अमृत योजना के आने से अवैध कनेक्शन ले चुके लोगों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। जलनिगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर में फिलहाल 44601 कनेक्शन हैं। जो पुरानी पाइप लाइन से जुड़े हैं। नई पाइप लाइन से भी सैकड़ों कनेक्शन हो चुके हैं। इनमें जिन लोगों ने बिना अनुमति पानी का कनेक्शन ले लिया है, उन्हें अमृत से वंचित रहना पड़ेगा।
ये है योजना
अमृत योजना के तहत 6856 नए कनेक्शन दिए जाने का लक्ष्य है। तकरीबन 20 करोड़ रुपये की इस योजना में 14 करोड़ रुपये वाटर मीटर पर खर्च किए जाएंगे। यह वाटर मीटर सभी नए और पुराने कनेक्शन में लगाए जाएंगे और शेष 6 करोड़ रुपये मेन पाइपलाइन से घर के दरवाजे तक आधा इंची पाइपलाइन खींचकर कनेक्शन देने पर खर्च होंगे। जिसका उपभोक्ता से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस योजना को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। धनराशि प्राप्त होने पर कार्य शुरू होगा। ठेके के जरिये यह काम कराया जाएगा।
जलनिगम दफ्तर में दें प्रार्थना पत्र
नि:शुल्क पेयजल कनेक्शन के लिए जलनिगम निर्माण इकाई के चौगुर्जी स्थित दफ्तर में प्रार्थना पत्र दिए जा सकते हैं। एक्सईएन एमपी सिंह ने बताया कि वैसे तो नगरपालिका से सूची प्राप्त होगी, लेकिन लोग चाहें तो सीधे जलनिगम विभाग को भी एप्लीकेशन दे सकते हैं। हालांकि नए कनेक्शन के लिए नगरपालिका से मंजूरी लेना जरूरी होगा।
वर्जन
अमृत योजना में नि:शुल्क कनेक्शन देने का प्रावधान है। योजना स्वीकृत हो चुकी है। धनराशि मिलना शेष है। योजना के तहत कनेक्शन देने का काम भी जलनिगम को दिया गया है।
एममी सिंह, एक्सईएन, जलनिगम निर्माण इकाई, इटावा