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महाभारत काल में बना था हजारी महादेव मंदिर

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सरसईनावर के उत्तर में स्थित श्री हजारी महादेव मंदिर को लेकर शिवभक्तों में गहरी आस्था हैं। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर हजारों की संख्या में कांवरिया मां गंगा के पवित्र जल से हजारी महादेव का अभिषेक करते हैं।
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स्वयंभू शिवलिंग भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने वाले माने जाते हैं। महापर्व को लेकर मंदिर में तैयारियां चल रही है। साथ ही दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के आने की व्यवस्था की गई।


महाशिवरात्रि पर सरसईनावर के हजारी महादेव मंदिर पर माहौल शिवमय हो जाता है। मंदिर में मौजूद अवशेष के आधार पर पुरातत्व विभाग ने इन्हें महाभारत कालीन माना हैं ।
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मंदिर में मुख्य शिवलिंग के अतिरिक्त एक हजार की संख्या अन्य शिवलिंगों की भी स्थापना की गई है। साथ ही राम दरबार, लक्ष्मी नारायण, काली मंदिर, हनुमान मंदिर भी हैं। इटावा जनपद ही नहीं वरन आसपास के किशनी, कुसमरा, मैनपुरी, सौरिख, कन्नौज, शिकोहाबाद, सिरसागंज, विधूना आदि स्थानों के हजारों की संख्या में भक्त बाबा हजारी महादेव मंदिर पर दर्शनों के लिए आते हैं।


हजारी महादेव मंदिर परिसर में मौजूद पीपल के वृक्ष को लेकर भक्तों की गहरी आस्था हैं आकार में बहुत छोटा होने के बाद भी इसकी आयु हजारों वर्ष पुरानी मानी जाती है। मान्यता है कि मंदिर से जुड़े हुए संत की समाधि पर पीपल वृक्ष उग आया था।


मंदिर से जुड़े हुए भक्त पातीराम पाल जिन्हें अव भक्त जूना भैया के नाम से जानने लगे हैं के द्वारा शिवभक्तों के लिए ॐ नम: शिवाय बीमा संस्था चलाई जाती है। इस अनूठी संस्था से जूना भैया अव तक तीन लाख लोगों को जोड़ चुके हैं।

हजारी महादेव मंदिर को नए तरीके से सजाया गया है। मंदिर पर रंगीन बल्बों की रोशनी की गई है। साथ ही होली तक चलने वाले मेला में दुकानें लगने लगी हैं। महंत सियाराम दास ने बताया कि कांवरियों का आना दो दिन पूर्व से प्रारंभ हो जाता है।

महाशिवरात्रि पर्व के संबंध में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वही प्रशासन की तरफ से भी अस्थायी पुलिस चौकी के साथ पीएसी बल की तैनाती रहेगी। इस संबंध में थानाध्यक्ष योगेंद्र शर्मा ने बताया कि पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा और लाइन से भक्तों को दर्शन कराए जाएंगे।


सरसईनावर के हजारी महादेव मंदिर में खंडित अवस्था में पाए गए अवशेषों का परीक्षण पुरातत्व विभाग कर चुका है। अवशेषों को महाभारत कालीन माना गया।

समझा जाता है कि वनवास काल में पांडव माता कुंती के साथ इस क्षेत्र में आए थे। उन्हीं के द्वारा हजारी महादेव के दिव्य शिवलिंग की स्थापना की गई थी। यहां से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थिति कुंइता गांव का नाम कुंती के नाम पर बताया जाता है।
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