इटावा। उरेंग गांव में बनी गोशाला में बीमार गोवंशों को इलाज नहीं मिल रहा है। दो गोवंश इस गोशाला में बीमार पड़े हैं। इनके इलाज की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। गोवंशों की देखरेख में लगे कर्मचारी इलाज की बजाय मरने वाले गोवंशों को लेकर ज्यादा सतर्क हैं। मरे हुए गोवंशों को आनन-फानन में गड्ढा करके दबाया जा रहा है ताकि यह बात लोगों तक न पहुंचे।
निवाड़ीकला-लुधियानी मार्ग पर मौजूद यह गोशाला ब्लॉक महेवा की उन पांच गोशालाओं में शामिल है, जिन्हें प्रशासन ने गोवंशों को रखने के लिए चयनित किया है। इसके बाद भी इस गोशाला में गोवंशों की देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। गोशाला में इस वक्त करीब 70 मवेशी बंद हैं। इनमें दो गायें कई दिनों से बीमार हैं। उनके इलाज की कोई सुध नहीं ली जा रही है। एक बीमार गाय का बच्चा भी भूखा-प्यासा लाचार अवस्था में खड़ा रहता है।
पिछले रविवार को गोशाला के बाहर एक मवेशी मृत अवस्था में पड़ा मिला था। इस अन्ना मवेशी के कान में टैग भी लगा था। कुत्ते इस मवेशी को नोंच कर खा रहे थे। लोगों तक यह खबर फैली, तभी कर्मचारियों ने उस मृत मवेशी को पास में एक गड्ढा करके दबा दिया।
फोन पर भी नहीं आते डाक्टर
उरेंग पंचायत के सचिव प्रवीन कुमार ने बताया कि जब भी कोई मवेशी बीमार पड़ता है तो डॉक्टर को फोन करते हैं लेकिन फिर भी नहीं आते। बगैर डाक्टर के इलाज कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि गोशाला के अंदर अभी तक एक भी गोवंश की मौत नहीं हुई है।
गोशाला के बाहर घूम रहे सांड़
उरेंग गांव की गोशाला होने के बाद भी तमाम सांड़ बाहर घूम रहे हैं। इन्हें गोशाला में नहीं रखा गया है। कर्मचारियों ने बताया कि सांडों को बाहर करवा दिया गया है। गोशाला में सिर्फ गाय और उनके बछड़े रखे गए हैं। सांड़ अहेरीपुर गोशाला में शिफ्ट करवाए जाएंगे ।