इटावा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान कोरोना से संक्रमित होने के कारण 15 शिक्षकों और कर्मचारियों की जान गई लेकिन शासन की गाइड लाइन में केवल एक प्रधानाचार्य को ही मृत मना गया है। उनके आश्रितों को अनुमान्य सहायता की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कर्मचारी संगठनों के विरोध के बाद शासन ने गाइड लाइन बदली है, इसलिए नई गाइड लाइन में अन्य 14 शिक्षकों-कर्मचारियों के परिजनों को भी सहायता मिलने की उम्मीद है।
पंचायत चुनाव के दौरान कर्मियों की कोरोना से मौत के आंकड़ों को लेकर घमासान मच गया था। शिक्षक, कर्मचारी संगठनों के अलावा राजनीतिक दलों ने सरकार को घेरा। इस पर शासन ने जिलों से आंकड़े तलब किए, तो जिलाधिकारी ने विभागों से रिपोर्ट मांगी। विभागों ने जो रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी है, उसके अनुसार चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमित होने से 15 शिक्षकों-कर्मचारियों की मौत हुई है। इसमें आठ बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक, चार माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षक, दो कृषि विभाग कर्मचारी और एक लघु सिंचाई के अभियंता शामिल हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के आधार पर हरकूपुर इंटर कॉलेज के प्रभारी प्रधानाचार्य मुन्ना लाल को ही चुनाव के दौरान मृत माना गया है। उनके परिजनों को अनुमन्य सहायता का लाभ देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कर्मचारी संगठनों के ऐतराज के बाद मुख्यमंत्री ने शासनादेश में संशोधन करा दिया है। किंतु संशोधित शासनादेश अभी तक जिले में नहीं पहुंचा है।
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पंचायत चुनाव के दौरान कोरोना संक्रमण से 15 शिक्षकों-कर्मचारियों की मौत होने की जानकारी विभागों से मिली है। रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। शासन का आदेश आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। -यतेंद्र सिंह, डीपीआरओ