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लूम से बने कपड़ों से मिली जिले को पहचान

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जिले की पहचान हमेशा से अनोखी रही है। समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव यदि जिले को देश के राजनीतिक पटल पर लेकर आए, तो डकैतों ने जिले का नाम खराब करने में कोई कोताही नहीं बरती।
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करीब दशक भर जिले का बीहड़ी क्षेत्र इन डकैतों के साए में रहा है। इसका खामियाजा उन युवाओं को भुगतना पड़ा। जो रोजगार या पढ़ाई लिखाई के लिए जिले से बाहर गए और तंज के शिकार बने।


एक समय देसी की घी की महक भी जिले की पहचान पर बनकर उभरी तो अब मोदी सरकार की एक जिला एक उत्पाद योजना (ओडीओपी) ने हैंडलूम व पॉवरलूम से बने कपड़ों ने पहचान दिलाई है। जो अभी कायम है।
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पुराना शहर में बुनकर समाज की आबादी करीब 17 हजार है। इनमें करीब चार हजार लोग हैंडलूम या पॉवरलूम चलाते हैं। वाह अड्डा मोहल्ले में रात दिन कपड़ा बुनने वाली मशीनों की खटपट सुुनी जा सकती है।

मेहनत मजदूरी के बाद भी यह परिवार आज जिले की पहचान के अनुरूप खुद को मजबूत नहीं कर पाए हैं। ज्यादातर परिवार अभाव की जिंदगी जी रहे हैं।

भौगोलिक रूप से इटावा जिला यमुना नदी के किनारे बसा है। शहर इटावा यूपी के पुराने शहरों में से एक है। प्राचीन इष्टिकापुरी नाम से भी तमाम लोग परिचित हैं। जिला का देश के कई शहरों से ट्रेन व सड़क के जरिये सीधा जुड़ाव है।

यमुना और इसकी कई सहायक नदियां यहां की उर्वरा को हरा भरा किए हैं। अधिकतर क्षेत्र में भोगनीपुर व निचली गंग नहरें सिंचाई का साधन हैं। चकरनगर जैसे बीहड़ी क्षेत्र में आज भी ज्यादातर गरीब किसान मानसून पर निर्भर हैं।

यहां के किसान साल भर में तीनों फसलें लेते हैं। इनमें खासतौर पर गेहूं, चावल, सरसों, आलू, बाजरा शामिल है। वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी की लहर ने इस लोकसभा सीट पर भी अपना असर दिखाया था। भाजपा प्रत्याशी अशोक दोहरे सांसद बने।

इटावा लोकसभा सीट पर काबिज रही पार्टियों को देखें तो आजादी के बाद ज्यादातर चुनावों में कांग्रेस का दबदबा रहा। समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने 1991 से जिले की इस सीट पर असर दिखाना शुरू कर दिया।

बसपा संस्थापक कांशीराम को उनका साथ मिला। अगले 1996 के चुनाव में सपा के राम सिंह शाक्य चुनाव जीते। दो साल बाद 1998 में भाजपा से सुखदा मिश्रा ने सीट पर कब्जा जमा लिया।

इसके बाद लगातार तीन बार 2009 तक समाजवादी पार्टी यह सीट जीतती रही। सपा की इस हैट्रिक ने ही जिले को उसका गढ़ बना दिया। इसे 2014 में भाजपा ने तोड़ा और मोदी लहर में सपा का किला ध्वस्त हुुआ था।

जाहिर है कि जिले में सपा की धमक रही है। चुनावी जीतहार में जाति का आंकड़ा खासा अहम रहा है। लगभग सभी दल जातियों को साधते हुए प्रत्याशी उतारते रहे हैं। जातियों को साधने में सिर्फ लोकसभा चुनाव ही नहीं बल्कि विधानसभा व पालिका चेयरमैन के प्रत्याशी चयन का भी आधार रहा है। ताकि जातियों को साधने में बैलेंस बना रहे।
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