इटावा। डेंगू के बुखार से ग्राम प्रधान मोहरी की मौत के बाद क्षेत्र में बुखार से पीड़ित मरीजों में दहशत का माहौल है। वहीं दूसरी तरफ ऊसराहार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र महीनों से बिना चिकित्सक के चल रहा है। ऐसे में मरीजों को सिर्फ झोलाछाप से इलाज करवाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
बदलते हुए मौसम के साथ बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या में ऊसराहार क्षेत्र में बढ़ती जा रही है। बीते एक माह से ऐसे मरीजों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। सरसई नावर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से लेकर झोलाछाप के यहां मरीजों की भीड़ है।
ऊसराहार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर कई वर्षों से डॉक्टर नहीं थे। शिकायत के बाद एक जून को स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए चिकित्सक की तैनाती कर दी थी, लेकिन दो माह बाद ही सितंबर माह में उन्हें भी हटा लिया गया। ऐसे में इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक नहीं है। ऐसे में जब क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के बुखार का चलन बढ़ा है तो मरीजों को सिर्फ झोलाछाप का ही आसरा है। ऊसराहार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर फॉर्मासिस्ट की तैनाती है।
यहां पर 75 से 80 मरीज चिकित्सा के लिए आते हैं। ऐसे में उनका इलाज कैसे होता है। यह बताने की जरूरत नहीं है। इस संबंध में उसराहार व्यापार मंडल अध्यक्ष अरुण गुप्ता अरविंद गुप्ता ने बताया कि उन्होंने कई बार इसकी शिकायत अधिकारियों से की है।
मरीजों की जानबूझकर अनदेखी की जा रही है। वहीं इस संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सरसई नावर के अधीक्षक डॉक्टर अवधेश यादव ने बताया चिकित्सक की तैनाती के लिए कई बार अधिकारियों को लिखा जा चुका है।
वहीं, सीएमओ अनिल अग्रवाल का कहना है कि इस समस्या की जानकारी पहले से है। वहां पर चिकित्सक की नियुक्त की जा रही है। जल्द ही चिकित्सक की तैनाती हो जाएगी।