आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर बस खराब होने से ऊसराहार थाना क्षेत्र मे फंसे प्रवासी 125 मजदूरों को पुलिस ने एक ही बस से भेज कर सामाजिक दूरी की धज्जियां उड़ा दी।
शुक्रवार को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर ऊसराहार थाना क्षेत्र के चैनेज नंबर 129 पर दिल्ली से विहार 125 मजदूरों को लेकर जा रही एक प्राइवेट बस खराब हो गई थी। बस चालक सभी मजदूरों को उसी जगह पर छोड़कर बस ठीक कराने लखनऊ चला गया।
मजदूरों में महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे बारह घंटे बीतने के बाद भूख प्यास से तड़प उठे। मामले की जानकारी ऊसराहार थानाध्यक्ष समीर सिंह को भी दी गई।
इस पर थानाध्यक्ष ने कहा कि उन्हें मदद के लिए कोई फंड नही मिलता। शाम छह बजे तक कोई मदद न मिलने पर रोते बिलखते बच्चो को देख स्थानीय लोगों ने अपने घर से चावल और गैस लाकर दी।
इसके बाद मजदूरों ने तहरी बनाकर किसी तरह बच्चों का पेट भरा। खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होने पर देर शाम थानाध्यक्ष समीर सिंह भी मौके पर पहुंचे ।
उसी बीच पंद्रह घंटे बीतने के बाद मजदूरों को लेने के लिए वही बस सही होकर पहुंच गई। मौके पर 120 से 130 मजदूरों को थानाध्यक्ष समीर सिंह ने भी उसी बस मे भूसे की तरह बैठाकर अपने थाना क्षेत्र से रवाना कर दिया।
थाना क्षेत्र के खरगपुर सरैया के समीप सर्विस रोड पर तपती धूप मे पंद्रह घंटे तक भूख प्यास से तडफते मजदूरों की मजबूरी का फायदा बस वाले ने भी खूब उठाया। मजदूर रामबाबू चंदन पंडित ने बताया बस मे 120 से 130 मजदूरों को भूसे की तरह भरा गया।
सभी मजदूरों से दो हजार से ढाई हजार तक किराया लिया गया। इतना ही नहीं मजदूरों के साथ पंद्रह किलो से अधिक लगेज होने पर उसका किराया भी बस वाले ने वसूल किया।
जब बस खराब हुई तो एक घंटे मे सही कराने की बात कहते हुए बीच रास्ते में छोड़ कर चला गया। बस में रखा खाने पीने का सामान भी नहीं उतारने दिया। मजबूरी में एक समोसा दस से पंद्रह रुपये का लेकर बच्चों को खिलाना पड़ा।