मोदी का स्वच्छता अभियान जिले में टॉय टॉय फिस्स होकर रह गया। शुरूवात में कुछ दिनों चले अभियान बाद में ठप हो गए। पुराने ढर्रे पर आए अधिकारी-कर्मचारी किसी खास मौके पर ही सफाई की सुध ले रहे हैं। सरकारी कार्यालय हो या फिर सार्वजनिक स्थान हर जगह गंदगी दिखाई देती है। वहीं आज कहीं सफाई अभियान भी नहीं चला।
नारों के साथ ही बढ़ने वाला जोश इन दिनों ठंडा हो गया है। एक वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा दिलाई गई स्वच्छता की शपथ लोग भूल गए। अन्य लोग तो दूर पार्टीजन भी अब इसे लेकर कोई अभियान नहीं चला रहे। इतना ही नहीं गंदगी के विरोध में कोई आवाज तक नहीं उठा रहे। शहर से लेकर गांव तक बजबजा रही गंदगी से जहां लोग परेशान हैं। बीमारियों की चपेट में आ रहे लोग शिकायतें कर रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई न होने से वे भी मायूस हैं। विभागीय उपेक्षा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शिकायतों के बाद भी सफाई तो दूर मच्छररोधी दवाओं का छिड़काव तक नहीं किया जा रहा। गुरुवार को जब विकास भवन का जायजा लिया तो वहां गंदगी नजर आई। खिड़कियों पर धूल जमी थी। इसके अलावा कचहरी रोड स्थित बीएसएनएल व मुख्य डाकघर के बाहर भी गंदगी दिखी। इसके अलावा अन्य कार्यालयों का भी यही हाल था। शहर के घंटाघर, माया पैलेस चौराहा, ठंडी सड़क, शिकोहाबाद चौराहा आदि अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी यही हाल मिला।
बिना सफाईकर्मी के कैसे हो सफाई?
बच्चों की पाठशालाएं गंदगी से जूझ रही हैं। परिसर ही नहीं कक्षाओं में भी झाड़ूू लगाने वाले नहीं हैं। परेशान शिक्षक शिक्षिकाएं निजी स्तर पर व्यवस्था कर सफाई करवा रहे हैं। इतना ही नहीं माध्यमिक विद्यालयों में भी बुरा हाल है। जिले के आधे से अधिक राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में सफाई कर्मी नहीं हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छता अभियान को काल्पनिक सहयोग दिया जा रहा है। गंदगी के चलते इन दिनों बढ़ रही बीमारियों के बावजूद भी शासन प्रशासन एवं विभाग सफाई व्यवस्था के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा।