एटा महोत्सव में मुशायरा के दौरान अपने कलाम पेश करतीं सवीना अदीब।
- फोटो : एटा महोत्सव में मुशायरा के दौरान अपने कलाम पेश करतीं सवीना अदीब।
एटा। राजकीय जिला कृषि एवं औद्योगिक विकास प्रदर्शनी एटा महोत्सव में बृहस्पतिवार की रात अखिल भारतीय मुशायरा का आयोजन हुआ। दूर-दूर से आए शायरों ने अपने कलामों से समा बांधा और लोग शुक्रवार भोर तक उन्हें सुनने के लिए पंडाल में डटे रहे। सबीना अदीब ने पढ़ा जो खानदानी रईस हैं, वो मिजाज रखते हैं नरम अपना, तुम्हारा लहजा बता रहा है तुम्हारी दौलत नई-नई है।
मुशायरे की शुरूआत एसएसपी श्याम नारायण सिंह ने फीता काटकर किया। मेधाव्रत शास्त्री, जहीर अहमद, दिनेश वशिष्ठ, पूर्व चेयरमैन परवेज जुबैरी, जाहिदा सुल्ताना, संयोजक आवेज ने शमा रोशन की। शायरों ने अपने कलामों से ऐसा समा बांधा कि श्रोता वाह-वाह कर उठे। हर कलाम पर उन्हें श्रोताओं से तालियां व दाद मिली।
आगाज करते हुए शायर मंजर भोपाली ने गंगा-जमुनी तहजीब को साथ लेकर पढ़ा, प्यार के कटोरे में गंगा का पानी। मेहसर अफरीदी ने सुनाया, राह के पत्थर को चकनाचूर होना चाहिए सिर्फ इतना ही नहीं वह हार अपनी मान ले वो हमारे सामने मजबूर होना चाहिए। जौहर कानपुरी ने कहा, जाम साकी इमाम की होगी मेरी हर बात काम की होगी, तेरे बच्चे हैं बदजुबान बहुत तेरी दौलत हराम की होगी।
नाजिम ए मुशायरा नदीम फारूक ने कहा, वह शख्स बाअमल था मगर जिद पर अड़ गया, अपनों से दूर होकर मुसीबत में पड़ गया, जिस दिन मेरे अर्ज की उसने खबर सुनी उस दिन से उसका जहनी तवाज़ुन बिगड़ गया। संचालक आवेश अली ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इंजीनियर इमरान अली, अफसार अहमद, मुजाहिद खान, इकरार हसन, मोहम्मद अनस आदि लोग मौजूद रहे।