एटा। सरकार दानेदार डीएपी के बजाए लिक्विड नैनो डीएपी का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसका बीज के साथ शोधन करने से पैदावार बढ़ने का दावा किया जा रहा है।
सरसों, मटर, आलू की बुवाई वर्तमान में भी चल रही है। गेहूं की भी कुछ दिनों बाद शुरू होगी। दानेदार डीएपी को लेकर समस्या बनी हुई है। नैनो डीएपी का उपयोग किसान नहीं कर रहे हैं। जबकि किसान उपयोग कर चुके हैं, वह बेहतर परिणाम आने की बात कह रहे हैं। जानकारों का कहना है कि नैनो डीएपी लिक्विड में आती है। एक एकड़ में गेहूं बीज के लिए 500 एमएल ही काफी होती है। इसको बीज के साथ मिला लिया जाता है, इसके बाद खेत में बिखेरा जाता है। अगर किसान चाहे तो पूर्व में बोई जाने वाली दानेदार डीएपी को आधी मात्रा में मिश्रण कर सकते हैं।
एआर कॉआपरेटिव सतीश कुमार ने बताया कि नैनो डीएपी का उपयोग किसान करके अच्छी पैदावार कर सकते हैं। यह सस्ती भी है और बीज शोधन करने से फसल अच्छी होती है। दानेदार डीएपी अनुदान काटने के बाद किसानों को दी जा रही है, इसकी कीमत भी अधिक है। नैनो देश का उत्पादन है और परिणाम भी अच्छे आ रहे हैं। संवाद