भूगर्भ जल की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। हर साल औसतन 1.40 मीटर भूजल स्तर नीचे गिर रहा है। निधौली कलां डार्क जोन से हटा तो अलीगंज ब्लॉक इसकी गिरफ्त में आ गया है। इसके बावजूद पानी की बर्बादी पर रोक नहीं लग पा रही है।
सभी सरकारी कार्यालयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना करने का प्रावधान पिछले साल किया गया था, लेकिन अधिकांश अधिकारियों की ओर से कवायद नहीं की गई, जिसकी वजह से सरकारी कार्यालयों में सिस्टम तैयार नहीं हो सके।
जलस्तर गिरने की वजह से सैकड़ों हैंडपंप सूख गए। जिला पंचायत राज विभाग के अधीन ग्रामीण क्षेत्रों में 38 हजार हैंडपंप हैं। एक साल के दरम्यान में भूजल स्तर में आई कमी से करीब एक हजार हैंडपंपों का पानी उतर गया। वहीं एटा शहर में लगे 1523 हैंडपंपों में से 150 खराब पड़े हैं।
- पानी का अनावश्यक अधिक मात्रा में प्रयोग
पर्यावरणविद ज्ञानेंद्र रावत ने बताया कि भौतिकवादी युग में लोग पानी की बर्बादी करते हैं, जबकि बरसात के पानी को संजोने के उपाय नहीं किए जा रहे। आने वाली पीढ़ियों के लिए लोगों को आगे आना होगा। वहीं सिंचाई विभाग के एसडीओ भरत भूषण ने कहा कि जिले में जलस्तर सुधारने को बरसात के पानी को संचयित करने के लिए सरकारी सहित निजी भवनों में भी व्यवस्था होनी चाहिए। जिससे जल संचयन किया जा सके।
ब्लॉक 2020 2021