एटा। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे विवाद का असर अब तारकोल के दाम पर भी पड़ने लगा है। युद्ध के बाद से तारकोल के दाम दोगुना होने पर जिले में प्रस्तावित सड़कों का डामरीकरण कार्य ठेकेदारों ने रोक दिया है। निर्माण कार्य बंद होने पर करीब 150 सड़कों का निर्माण बंद है। इसमें मरथरा से मिरहची-मारहरा होते हुए मोहनपुरा तक 24 किमी लंबी सड़क, जीटी रोड की मरम्मत समेत अन्य कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।
जिन सड़कों का निर्माण कार्य ठेकेदारों ने रोक दिया है उनके टेंडर के समय तारकोल के दाम 43 रुपये प्रतिकिलो थे। एस्टीमेट तैयार किए जाने के समय तारकोल की दर 43 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से निर्धारित की गई। इसी के अनुसार ठेकेदार को भुगतान किया जाना है। अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद से तारकोल के लगातार दाम बढ़ते जा रहे हैं। दाम बढ़ने पर ठेकेदारों ने निर्माण कार्य बंद कर दिए, इस समय तारकोल के दाम 84 रुपये प्रतिकिलो हैं। दोगुने का अंतर होने पर ठेकेदारों को घाटा होना तय है। सरकार ने इसका संज्ञान लेते हुए अंतर की भरपाई का आश्वासन दिया है। इसके बाद भी ठेकेदार नुकसान की आशंका के चलते काम शुरू नहीं कर रहे हैं। इससे जिले की 150 से अधिक सड़कों का निर्माण कार्य बंद है।
मरथरा से मोहनपुरा सहित इन प्रमुख सड़कों का निर्माण कार्य प्रभावित
मरथरा से मिरहची-मारहरा होते हुए मोहनपुरा तक 24 किमी सड़क का 37 करोड़ रुपये से चौड़ीकरण कराया जा रहा है। मरथरा से मिरहची तक सड़क का निर्माण हो चुका है, इससे आगे का काम तारकोल महंगा होने से बंद है। पिवारी से रतिभानपुर तक नौ किमी 12 करोड़ रुपये से, ऊंचागांव से बेरनी तक छह किमी नौ करोड़ रुपये की सड़क सहित जिले की 150 सड़कों का निर्माण प्रभावित है।
एस्टीमेट और बाजार के रेट के अंतर की भरपाई पूरी करने का शासनादेश जारी हो चुका है, लेकिन तारकोल की बाजार में उपलब्धता सबसे बड़ी समस्या है। तारकोल महंगा होने के साथ ही बाजार में उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते मिरहची-मोहनपुरा सड़क का बाधित है। - सुनील यादव, राजकीय ठेकेदार
तारकोल महंगा होने और बाजार में उपलब्धता न होने पर ठेकेदार मानसिक रूप से बहुत परेशान थे। सरकार ने अंतर की भरपाई का आदेश जारी कर बहुत अच्छी पहल की है, वरना अनेक ठेकेदार तनाव में आ सकते थे। सरकार को उपलब्धता पर भी ध्यान देना होगा, तभी समस्या का समाधान हो सकेगा। - सतेंद्र सिंह राठौर, राजकीय ठेकेदार
अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद से तारकोल की समस्या पैदा हो गई है। महंगा होने के साथ ही उपलब्धता की समस्या है। निर्माण कार्य प्रभावित होने पर सरकार ने संज्ञान लेते हुए एस्टीमेट के 43 रुपये प्रतिकिलो और वर्तमान के दाम के अंतर की भरपाई करने को कहा है, जिसका पत्र विभाग में आ चुका है। ठेकेदारों से संपर्क कर काम शुरू करने को कहा जा रहा है, क्योंकि मानसून आने के बाद डामरीकरण का काम नहीं हो सकेगा। - आदर्श वर्मा, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी सीडी-1