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महिला समानता दिवस पर विशेष:हर मोर्चे का डट कर मुकाबला कर रहीं महिलाएं

Thu, 25 Aug 2016 11:16 PM IST
अमर ब्ययूराो एटा
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हर मोर्चे का डट कर मुकाबला कर रहीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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 जनगणना 2011 के आंकड़ों में भले ही जिले की महिलाएं साक्षरता और लिंगानुपात में पीछे हों, लेकिन पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिला रही हैं। खेल का मैदान हो या खेत की माप। देश सेवा और जनता की सुरक्षा करने में पीछे नहीं हैं। समाज सुधार की बात हो या घर संभालने की, हर मोर्चे पर महिलाएं मुकाबला कर रही हैं। जिले की महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपना दबदबा कायम किया है। शुक्रवार को महिला समानता दिवस है।  
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लेखपाल बनकर बेटी ने बढ़ाया मान
जिले के शिवसिंहपुर निवासी राज मिस्त्री महाराज सिंह की बेटी रूबी ने लेखपाल बनकर जिले का मान बढ़ाया है। यह पहला मौका है कि लेखपाल की नौकरी में आधी आबादी ने दबदबा कायम किया। इससे पहले रूबी पुलिस भर्ती में जगह बना चुकी हैं। रूबी के साथ जिले में छह बेटियों ने लेखपाल के पद पर चयन पाया है।
 
एसएससी में चमकी पूनम
जिले की पूनम ने भी कर्मचारी चयन आयोग की स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण कर इबारत कायम की है। पूनम ने कड़ी मेहनत के बाद हौसले और हुनर के दम पर ये कामयाबी हसिल की है। गांव भजुआ निवासी खुशबू की काबिलियत पर हर किसी को गर्व है और जिले की युवतियों के वे प्रेरणा बन गई हैं।  
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खुशबू के सपनों ने लगाई छलांग
कूद प्रतियोगिताओं और खो-खो में तीन बार राष्ट्रीय खेलों में प्रतिभाग करने वाली खुशबू वर्मा ने जिले का नाम रोशन किया है। पिता श्रीपाल सिंह की मौत के बाद भी खुशबू ने आंध्र प्रदेश से लेकर दिल्ली तक अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। स्टेट लेवल पर कई पदक जीत चुकी खुश्बू के पास जिला चैंपियन का गौरव है।  
 
कीर्ति ने फहराई यश पताका
गांव शिवसिंहपुर निवासी कीर्ति वर्मा ने आल इंडिया विवि खेलों तक अपनी धाक जमाई है। 10 किमी क्रास कंट्री दौड़ में प्रदेश स्तर पर गोल्ड मेडल पाने वाली कीर्ति का हौसला काबिले तारीफ है। किसान रूप सिंह की बेटी कीर्ति कहती हैं कि रुकावटें तो आती हैं, लेकिन रुकना सीखा नहीं है।
 
देश सेवा में अमृता का दबदबा
जिले के गांव डांडा गंगनपुर निवासी सत्यपाल सिंह की बेटी अमृता यादव ने सेना में कैप्टन बनकर नई मिसाल कायम की है। बंगलूरु में सेना में कार्यरत अमृता यादव जिले की बेटियों और नारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं। उन्होंने चेन्नई में पासिंग आउट परेड में स्थान पाकर जिले का नाम रोशन किया है।
 
महिलाओं की आवाज बनी निरुपमा
जिले में महिलाओं की आवाज को निरुपमा वर्मा ने बुलंद किया है। घूंघट की ओट से महिलाओं को अपनी बात कहना निरुपमा वर्मा ने सिखाया। उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या, कुपोषण, दहेज प्रथा के खिलाफ नारियों को सशक्त बनाया।
 
यह है आंकड़ों का सच
आंकड़ों पर गौर करें तो हकीकत बिल्कुल जुदा है। लिंगानुपात के मामले में जिले में एक हजार पुरुषों पर 873 महिलाएं हैं। जबकि महिला साक्षरता दर 58.80 फीसद है। ऐसे में आंकड़ों में महिलाओं में जागरूकता की जरूरत है। 
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