पारा चढ़ने के साथ ही जिले में पानी की मांग भी बढ़ रही है। शहर के अलावा पेयजल योजना के तहत बनी गांव में पानी की टंकियां कहीं खराब पड़ी हैं, तो कहीं पेयजल योजना बनकर तैयार ही नहीं हुई हैं। इससे नगर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी पानी का संकट हो गया है। तो दूसरी ओर बिजली कटौती भी पानी की समस्या बढ़ा रही है। हालांकि पालिका पर्याप्त मात्रा में सप्लाई होने का दावा कर रही है लेकिन मौजूद संसाधन में से आधे से ज्यादा खराब पड़े हैं।
पालिका के अनुसार शहर की आबादी करीब एक लाख 30 हजार के है। उसके अनुसार औसतन दिन में एक आदमी 70 लीटर पानी खर्च कर लेता है, लेकिन पानी की मांग गर्मियों के दिनों में दोगुनी हो जाती है। पालिका के पास 32 में से 13 नलकूप सही हैं, जिनसे सीडब्लूआर, ओवरहेड टैंकों को सप्लाई दी जा रही है। शहर में मौजूद 11 ओवरहेड टैंक में से तीन अब भी खराब हैं। ऐसे में पालिका शहर में पर्याप्त मात्रा में पानी की सप्लाई का दम भर रही है। गनीमत यह है कि गत सालों की तरह अभी लो वोल्टेज की समस्या पालिका के सामने नहीं आई है। शहर के ऊंचे इलाकों में मारहरा दरवाजा, कटरा मोहल्ला सहित आदि इलाकों में पानी प्रेशर के साथ नहीं पहुंच रहा है।
इससे लोगों को पानी की किल्लत से जूझना पड़ता है। इसे लेकर भी पालिका का कहना है कि इस संबंध में अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है। पालिका की जलकल टीम शहर में घूमकर पानी सप्लाई का जायजा ले रही है। दूसरी ओर, गांव देहात में लगे ज्यादातर हैंडपंप खराब पड़े हैं।
ग्रामीण इलाकों में भी पेयजल योजना नहीं हो रही कारगर
खारे पानी की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों को मीठा पानी उपलब्ध कराने के लिए शासन ने ग्रामीण पेयजल योजना शुरू की थी। इसमें जल निगम की ओर से गांवों में पानी की टंकी की स्थापना करना और गांव में पाइप लाइन बिछा के घर-घर पानी की सप्लाई की जानी थी। इसके तहत ही शीतलपुर के गांव मरथरा में पेयजल योजना तो बनी। ग्राम प्रधान ने कई बार डीएम से शिकायत कर विभाग पर यह आरोप लगाया कि विभाग आधी अधूरी बनी योजना को ग्राम पंचायत को सौंपने का दबाव बना रहा है। जबकि गांव में पानी की सप्लाई अब नहीं हो पाई है।
शहर में मांग के अनुरूप पानी की सप्लाई की जा रही है। सप्लाई बाधित होने और प्रेशर के साथ न पहुंचने की पालिका को अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है।
- सोबरन सिंह, जलकल प्रभारी