एटा। पानी सहेजने को अब जिले में काम होगा। मनरेगा योजना से जिले के 110 तालाबों को सहेजा जाएगा। कीचड़ और अतिक्रमण हटाकर इनको गहरा किया जाएगा, जिससे बारिश का पानी इसमें रुक सके। जल संरक्षण की दिशा में होने वाले इस काम के लिए सभी ब्लाकों से प्रस्ताव भेजे गए थे। जहां तालाबों को चिन्हीकरण कर अब काम शुरू कर दिया गया है।
मानसून आने से पहले जिले में तालाबों को सहेजने का काम शुरू हो गया है। आठ ब्लॉकों में बारिश के पानी को तालाबों में एकत्रित करने की योजना बनाकर काम करने के लिए सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
वहीं मनरेगा योजना से होने वाले इस काम के लिए तालाबों के सुंदरीकरण में लगाए जाने वाले मजदूरों की संख्या और काम करने के दिनों का प्लान बीडीओ को बनाने के निर्देश दिए गए है। वहीं लगभग आधा सैकड़ा से अधिक तालाबों का निर्माण भी शुरू हो गया है।
सिक्योर सॉफ्टवेयर पर बना एस्टीमेट
मनरेगा के तहत होने वाले सभी कार्य आनलाइन कर दिए गए हैं। इसके लिए बीते दिनों सिक्योर सॉफ्टवेयर बनाया गया है। इस साफ्टवेयर पर अब तक 60 तालाबों का एस्टीमेट बनाया जा चुका है।
जिले में हैं 1698 मनरेगा मजदूर
जिले के आठ ब्लॉकों की 576 ग्राम पंचायतों में 1698 मनरेगा मजदूर कार्यरत हैं। पंचायती राज विभाग से जो भी कार्य कराया जाता हे। यहीं ग्राम पंचायतों के मजदूर करते हैं। वहीं तालाबों की खुदाई आदि का कार्य भी मनरेगा मजदूर ही करेंगे।
तीन विकास खंड डार्क जोन में शामिल
जिले के तीन विकास खंड जलेसर, सकीट और मारहरा में भूजल स्तर गिरता ही जा रहा है। प्रशासन द्वारा इन्हें डार्क जोन में शामिल किया जा चुका है। इस विकास खंडों में जहां पहले 60 से 80 फुट पर पानी मिल जाता था वहां अब यहां 120 से 130 फुट पर पानी मिल रहा है।
जिले में लगातार जल स्तर गिर रहा है। इसी को लेकर शासन से जल संरक्षण के लिए तालाबों का निर्माण कराने के निर्देश दिए गए थे। निर्देशों का अनुपालन किया जा रहा है। जिले के आठ ब्लॉकों में 110 तालाबों को निर्माण कराया जाएगा। आधा सैकड़ा से अधिक तालाबों का निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया है।
उग्रसेन पांडेय, सीडीओ