एटा। सर्दी-खांसी से पीड़ित 8 वर्षीय बालक 27 जनवरी को पीएचसी सेनाकलां पर दवा लेने गया था। उसे पीएचसी पर एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगाने की बात कही गई थी। इंजेक्शन लगने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। इसके बाद उसकी मौत हो गई थी। मामले में सीएमओ ने 3 सदस्यीय जांच का गठन किया। टीम के सदस्यों ने बताया है कि वार्ड ब्याॅय ने डॉक्टर बन इंजेक्शन लगाया था। उसने फार्मासिस्ट को सूचना भी नहीं दी थी।
नगला सुभान निवासी 8 वर्षीय प्रशांत को सर्दी के साथ खांसी की दिक्कत थी। 27 जनवरी को वह अपनी बहन के साथ सेनाकलां पीएचसी पर दा लेने गया था। परिजन का आरोप था इंजेक्शन लगाने के बाद उसकी हालत बिगड़ी थी उसे मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी लेकर पहुंंचे थे। यहां उसे मृत बता दिया था। 28 जनवरी को उसका पोस्टमार्टम हुआ था उसमें मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। मामले में एसीएमओ सहित डिप्टी सीएमओ व वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक की टीम सीएमओ ने बनाई थी।
टीम सेनाकलां में जांच करने गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार जिस दिन बालक दवा लेने पीएचसी गया था। उस दिन चिकित्सक आगरा एक प्रशिक्षण में गए हुए थे। पीएचसी पर फार्मासिस्ट व वार्ड ब्याॅय मौजूद थे लेकिन वार्ड ब्याॅय ने फार्मासिस्ट से बिना पूछे बालक को इंजेक्शन लगा दिया था। इंजेक्शन बुखार का ही लगाया था। सीएमओ डॉ. उमेश त्रिपाठी ने बताया कि अभी जांच रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।