एटा। परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा करना विधायकों और सांसदों को रास नहीं आ रहा है। लोकतंत्र में जनता की ओर से आम से खास बने विधायक व सांसद सरकार की इस सुविधा का उपयोग करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। बात एटा की करें तो पिछले 33 सालों में किसी भी सांसद या विधायक ने रोडवेज की बस में सफर नहीं किया है।
रोडवेज बस में विधायक और सांसदों के लिए प्रथम दो सीटें आरक्षित होती हैं। ताकि, कोई पूर्व या वर्तमान विधायक और सांसद बस में आए तो उन्हें सीट उपलब्ध हो सके। इसके लिए सरकार की ओर से ही सांसद या विधायक के लिए निशुल्क यात्रा आधारित कूपन दिए जाते हैं। माननीयों की बस यात्रा के खर्च, किराए का भुगतान विधानसभा सचिवालय से रोडवेज को किया जाता है।
इस सुविधा में विधायक व सांसद के साथ एक सहयोगी को भी निशुल्क यात्रा की सुविधा मिली हुई है। यात्रा के दौरान विधायक व सांसद को विधानसभा व संसद से जारी कूपन परिचालक को देना होता है। इसकी एवज में मुख्य यात्रा टिकट के साथ सहयोगी का टिकट भी जारी होता है, जिसमें वे कितनी भी यात्रा कर सकते हैं। किन्तु, एटा रोडवेज की बसों की बात की जाए तो बसों में अर्से से किसी सांसद या विधायक ने सफर नहीं किया है। बीते 33 सालों से बसों को माननीयों का इंतजार है। दरअसल, आम से खास बनने के बाद नेताजी निजी लक्जरी गाड़ियों को ही तबज्जो देते हैं। ऐसे में सरकार की रोडवेज बसें उन्हें रास नहीं आतीं। क्योंकि, उन बसों में लक्जरी गाड़ियों की तरह सुख सुविधाएं नहीं होती हैं।
33 साल पहले जलेसर विधायक ने किया था सफर
जलेसर विधानसभा क्षेत्र से 1985 में विधायक चुने गए प्रेमपाल सिंह सम्राट ने 1989 तक विधायक पद पर रहते हुए रोडवेज बस का सफर इन सीटों पर किया। वही पूर्व विधायक होने के बाद भी कुछ सालों तक यात्रा करते रहे। हालांकि बाद में बुजुर्ग होने पर निजी वाहनों से ही सफर तय किया जाने लगा।
परिवहन निगम की बसों में जनप्रतिनिधियों के लिए दो सीटें आरक्षित होती हैं। एटा डिपो की बसों में 33 साल पहले कांग्रेस विधायक प्रेमपाल सिंह सम्राट ने सफर किया था, इसके बाद से किसी भी जनप्रतिनिधि ने सुविधा का लाभ नहीं लिया है। -राजेश यादव, एआरएम