नोट बंदी के फैसले के बाद व्यापारी कंगाल हो चले हैं और दुकानें खाली हो रही हैं। पुराना माल दिवाली पर बिक चुका है और अब नया माल मंगाने के लिए पैसा पास नहीं है। ऐसे में छोटे दुकानदारों को खासी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। वहीं प्लास्टिक मनी और स्वाइप मशीन के प्रयोग की जानकारी नहीं होने से व्यापारी परेशान हैं।
नोट बंदी के फैसले के बाद बाजार में भूचाल आया है। 500-1000 के नोट नहीं होने से बाजार सूना-सूना हो गया है। आलम यह है कि छोटे दुकानदार खुले रुपयों को लेकर दिक्कत झेल रहे हैं। माल को उधार बेच-बेचकर दुकान खाली हो चुकी है और नया माल का आर्डर देने के लिए जेब में दाम नहीं है। आलम यह है कि पान, गुटखा, चाय, हथठेल और किराना व्यापारियों के पास स्टॉक खत्म हो चला है। नोट बंदी को 11 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक बाजार में तेजी नहीं आई है। जिले के व्यापारी अधिकांशत: प्लास्टिक मनी और स्वाइप मशीनों के प्रयोग से डरते हैं। ऐसे में दुकानदारी और व्यापार चलाने के लिए नोट बंदी का फैसला परेशानी बढ़ाता जा रहा है।
किराना व्यापारी राजेश कहते हैं कि अब तक तो काम चल गया, लेकिन 500-1000 के नोट बंद होने के बाद बाजार ठप है। व्यापारी भोले उपाध्याय का कहना है कि माल कैश में मंगाते हैं। छोटे नोट नहीं आने से व्यापार ठप सा है। वहीं दुकान उधार दे-देकर खाली हो चली है। व्यापारी सचिन गुप्ता का कहना है कि छोटे-मोटे सामान को बेचने के लिए स्वाइप मशीन रखना बहुत अटपटा सा लगता है। बाजार में खुले रुपये आने तक इंतजार कर रहे हैं। तब तक जैसे-तैसे काम चल रहा है।