बदले मौसम के साथ साथ बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों तक मरीजों की भीड़ लगी है। पैथॉलोजी रिपोर्ट के अनुसार सर्दी-जुकाम, वायरल, मलेरिया, टाइफाइड और डेंगू के दर्जनों टैस्ट लगातार हो रहे हैं इसमें कई पाजीटिव मिल रहे हैं।
चटक गर्मी उमस और कम बारिश से बीमारियों का ग्राफ बढ़ रहा है। चिकित्सकों के यहां मरीजों की कतार लगी है। जिला अस्पताल में पचास प्रतिशत तक मरीज बढ़े हैं। वहीं निजी चिकित्सकों के यहां सौ प्रतिशत तक की वृद्घि हुई है। सबसे ज्यादा पीड़ित वायरल, मलेरिया, टाइफाइड और डेंगू के हैं। हालांकि जिला अस्पताल प्रशासन डेंगू मरीज न मिलने की बात कह रहा है। पैथोलॉजी संचालकों का दावा है कि हर रोज दर्जनों मरीज डेंगू के मिल रहे हैं। पूर्व में दिल्ली से आए लोगों में इसके लक्षण मिले थे जबकि अब स्थानीय मरीजों में भी डेंगू की पुष्टि हो रही है।
ये हैं डेंगू पीड़ित
जांच रिपोर्ट में चिन्हित हुए डेंगू मरीजों में गांव जवाहरपुर निवासी पुष्पा देवी, प्रसूना, विमला देवी, राजबेटी, शहर निवासी मनोरमा, हरवीर सिंह, जुगेंद्र सिंह जहां शहर के निजी चिकित्सकों के यहां उपचार करा रहे हैं। वहीं शहर दर्जनों पीड़ित आगरा, अलीगढ़ और दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती हैं।
बदले मौसम में मरीजों की संख्या बढ़ी है। ओपीडी मरीजों की संख्या चालीस से पचास प्रतिशत तक बढ़कर डेढ़ हजार तक पहुंच गई है। इनमें सर्वाधिक वायरल, मलेरिया, टाइफाइड आदि के हैं। डेंगू का कोई पीड़ित नहीं मिला है।
- डा. प्रदीप कुमार, सीएमएस
मरीजों की संख्या दोगुनी तक कर दी है। रक्त जांच में सर्वाधिक मरीज वायरल, मलेरिया, टाइफाइड, पीलिया के हैं। पूर्व दिनों में मिले अधिकांश डेंगू पीड़ित दिल्ली से आने वाले थे। जबकि अब जनपदीय लोगों में भी डेंगू के लक्षण मिल रहे हैं। स्थानीय स्तर पर होने वाले स्क्रीनिंग टेस्ट में डेंगू के भी दर्जनभर मरीज प्रतिदिन मिल रहे हैं।
- डा. हर्षवर्द्घन बिसारिया, पैथोलॉजी संचालक
ये हैं लक्षण और बचाव
-डेंगू मच्छर साफ पानी में पनपता है।
-ऐसे में घरों में कूलर, गमले व अन्य होम प्लांट में जमा पानी से बचें।
- खुली नालियों में सफाई की पूरी व्यवस्था करें।
-उल्टी, बुखार की शिकायत पर तुरंत उपचार दिलाएं।
42 मरीज मलेरिया के निकले
जिला मलेरिया अधिकारी हरिप्रसाद ने बताया कि अगस्त माह में मलेरिया की जांच के लिए 4849 स्लाइट बनाई गईं, इनमें से 42 मलेरिया के मामले सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर ही मरीजों का उपचार किया जा रहा है।