मेटरनिटी विंग की ओपीडी में लगी मरीजों की लाइन ।
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एटा। बुखार के गंभीर हालातों के बीच मेडिकल कॉलेज में मरीजों को राम भरोसे छोड़ा जा रहा है। मैटरनिटी विंग में रात के समय चिकित्सक मौजूद नहीं रहते हैं। मंगलवार रात बुखार से पीड़ित बच्चे की हालत बिगड़ गई। डॉक्टर न होने पर महिला उसे एक बंगाली डॉक्टर के यहां दिखाने ले गई। सुबह महिला फिर बच्चे को लेकर मैटरनिटी विंग में ले आई। वहां भर्ती बच्चे का इलाज बंगाली डॉक्टर से चल रहा था।
गांव नगला सिमरत निवासी करिश्मा ने बताया कि पीडियाट्रिक वार्ड में चार दिनों से उसका बच्चा भर्ती है। यहां चिकित्सक की ओर से लिखी गई कई दवाएं नहीं मिलती हैं। बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। मंगलवार की रात बच्चे की हालत बिगड़ गई। वह चिकित्सक को खोजती रही, लेकिन कोई मौजूद नहीं था। हालत खराब होने पर बाहर एक बंगाली डॉक्टर के पास ले गई। उन्होंने बच्चे का इलाज किया। सुबह के समय वार्ड में भर्ती करने के लिए भेज दिया। महिला ने कहा कि दिन में तो डॉक्टर देख जाते हैं, लेकिन बाद में कोई देखने भी नहीं आता है।
इमरजेंसी में भी नहीं लगाई इंट्राकेट
महिला ने बताया कि मंगलवार को दिन से ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स बच्चे के इंट्राकेट नहीं लगा पाईं। उन्होंने इमरजेंसी वार्ड में भेज दिया। वहां चिकित्सकों ने लगाने से मना कर दिया। महिला ने बताया कि उसने पचास रुपये देकर बाहर से इंट्राकेट लगवाई।
तीन बच्चे हुए भर्ती
बुधवार को मैटरनिटी विंग में तीन बच्चों को भर्ती किया गया। दो बुखार से पीड़ित थे। जबकि थैलेसीमिया से ग्रस्त तीसरा बच्चा ब्लड चढ़वाने के लिए लाया गया था।
ओपीडी में रही भीड़
बुधवार को मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में भीड़ रही। इस दौरान बड़ी संख्या में वायरल बुखार से ग्रसित मरीज ओपीडी में पहुंचे। डॉ. आशीष गुप्ता ने बताया कि बुखार सहित सांस के रोगी अधिक आ रहे हैं।