विकास काम नहीं होने से बदहाल पड़ा रास्ता
- फोटो : amar ujala
शीतलपुर खंड विकास की छितौनी ग्राम पंचायत के प्रधान द्वारा लाखों रुपये के गबन का आरोप लगाते हुए डीएम से शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोप है कि वित्त वर्ष में लाखों के विकास कार्य दिखा कर खाते से पैसा निकाल लिया गया, लेकिन विकास नहीं करा कर अपने मकान बनाया और कार खरीद ली। ग्रामीणों की माने तो ब्लॉक से ग्रामीणों को आरटीआई के तहत सूचना तक नहीं दी गई। जब ग्रामीणों ने राज्य सूचना आयोग में आवेदन किया तो तो गबन का खुलासा हुआ।
छितौनी निवासी महेंद्र सिंह द्वारा डीएम कार्यालय में दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है कि ग्राम प्रधान द्वारा 2 मई, 2016 को दिखाई गई ग्राम पंचायत की खुली बैठक फर्जी है। आरोप है कि गांव में गिरंद के मकान से अनार सिंह के घर तक खड़ंजा मरम्मत दिखाया गया, लेकिन मरम्मत का काम नहीं हुआ और खाते से धन निकाल कर हड़प लिया गया। रोशनलाल के नलकूप से नगला पुरविया के बीच कलवर्ड निर्माण दिखाया, लेकिन कलवर्ड का निर्माण नहीं हुआ। गांव में पन्नालाल के मकान से पूरन सिंह के प्लाट तक और पन्नालाल के मकान से श्यामलाल के मकान तक खड़जे का निर्माण कराना शामिल है, लेकिन आज कोई खड़ंजा बना नहीं।
आरोपों की इसलिए भी पुष्टि हुई है कि गांव में हजारों रुपये मिट्टी डालने का खर्च दिखाते हुए विरामपुर निवासी मजदूर संजय कुमार के नाम से ट्रैक्टर से मिट्टी डलवाने भुगतान दिखाया गया, जबकि संजय के पास न तो ट्रैक्टर और न ही वो ट्रैक्टर चलाता है। भुगतान नहीं मिलने को लेकर संजय ने शपथपत्र दिया है। मनरेगा योजना के तहत तालाब खुदवाई के मस्टरोल हैं, लेकिन आजतक तालाब खोदा नहीं। मस्टरोल पर मजदूरों के दस्तखत एक पेन और एक हैंडराइटिंग के हैं। घोटले की रकम सात से आठ लाख रुपये बताई गई। ग्रामीण की शिकायत पर डीएम विजय किरन आनंद ने जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ग्राम प्रधान प्रेम किशोर का कहना है कि कोई गबन नहीं किया है। विरोधियों के आरोप निराधार हैं।