स्क्रीनिंग के लिए चिह्नित उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन वीडियोग्राफी के साए में शुरू कराया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक की उपस्थिति में उत्तर पुस्तिकाओं के बंडल खोले गए। वहीं उपनियंत्रक डॉ दिनेश वशिष्ठ द्वारा गठित समितियों से संबंधित बंडलों के विषय में आख्या भी मांगी है।
सामूहिक नकल की शिकायत एवं आशंका पर स्क्रीनिंग मूल्यांकन के आदेश वाले बंडलों का गुरुवार को जिला विद्यालय निरीक्षक की उपस्थिति में मूल्यांकन किया गया। कैमरों एवं वीडियोग्रीफी के साथ बंडल खोले गए। चिह्नित उप प्रधान परीक्षकों की टीम ने इनका मूल्यांकन शुरू किया। उपस्थित उप प्रधान परीक्षकों एवं परीक्षकों को निर्देशित करते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक मनोज कुमार गिरि ने कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन काफी गंभीरता से होना चाहिए। स्क्रीनिंग वाले बंडलों को और अधिक जिम्मेदारी से मूल्यांकन करना है। साथ ही टीम को इन कापियों के बारे में अपनी आख्या भी देनी है। जिससे उक्त केंद्र पर सामूहिक नकल की शिकायत पर बोर्ड को स्क्रीनिंग टीम की राय भेजी जा सके। उपनियंत्रक डॉ दिनेश वशिष्ठ ने सभी टीमों को लिखित आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इस दौरान सह उपनियंत्रक ओपी शर्मा, सर्वेश दीक्षित, शैलेंद्र मिश्र आदि उपस्थित थे। बताते चलें कि मूल्यांकन केंद्र पर आई उत्तर पुस्तिकाओं में से पांच केंद्रों की कापियों की स्क्रीनिंग के आदेश हैं।
मूल्यांकन केंद्र पर पहुंचे जिला विद्यालय निरीक्षक मनोज कुमार गिरि ने दर्जनों परीक्षकों की उत्तर पुस्तिकाओं को देखा। साथ ही परीक्षकों की शैक्षिक योग्यता, विद्यालय एवं अनुभव की भी पड़ताल की। इस अवसर युवा परीक्षक श्वेता, शिवानी एवं संध्या यादव, श्रुति तोमर, ऊषा यादव, यश सक्सेना आदि से मूल्यांकन की जानकारी ली। साथ ही निर्देश दिए।
इस अवसर पर सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य एवं उप प्रधान परीक्षक रामपाल सिंह, सोहन चंद्र शर्मा, स्वर्ण सिंह आदि का कहना है कि कई केंद्रों की कापियों में समानता मिल रही है। इतना ही नहीं इन केंद्रों के परीक्षार्थियों ने उत्तर पुस्तिकाओं में भी यह शिकायत की है कि सुविधा शुल्क देने वालों को केंद्र पर नकल कराई जा रही है।